बुनकरों के विकास से ही संभवत बिहार का विकास हो सकता है- प्रकाश पटवा

गया।बिहार के गया जिले में स्थित मानपुर पटवा टोली गांव, जिसे बिहार का मैनचेस्टर भी कहा जाता है, में सूती कपड़े का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है¹। यहां लगभग 11,000 पावर लूम और हैंडलूम हैं, जिनमें लगभग 40,000 कामगार काम करते हैं।
मगध बुनकर कल्याण समिति सह जदयू व्यवसाय उद्योग के अध्यक्ष प्रकाश राम पटवा ने बताया कि बुनकरों के व्यवसाय में निखार नहीं आ रहा है, क्योंकि केंद्र और बिहार सरकार द्वारा इस क्षेत्र के विकास के लिए कोई सार्थक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
बुनकरों की समस्याओं में शामिल हैं:
*बिजली की अनियमित आपूर्ति*: बिजली की कटौती और अनियमित आपूर्ति के कारण उत्पादन प्रभावित होता है।
*बिजली बिल में वृद्धि*: बिजली बिल पहले की तुलना में चार गुना बढ़ गई है।
*ऑनलाइन मार्केटिंग में चुनौतियां*: बड़े ब्रांडों के कारण छोटे बुनकरों की उत्पादों की विक्री कम हो गई है।
— *कार्यशील पूंजी की कमी*: प्रत्येक पावर लूम पर 15,000 रुपये की कार्यशील पूंजी की घोषणा के बावजूद बुनकरों को यह राशि नहीं मिली है।
*बैंक ऋण की कमी*: बुनकरों को कम दर पर बैंक ऋण नहीं मिल पा रहा है।- *आधुनिक तकनीक की कमी*: आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण केंद्रों की कमी है।
– – *कच्चे माल की खरीदारी में समस्या*: वस्त्र बुनाई के लिए कच्चे माल की खरीदारी बिहार से बाहर के राज्यों से करनी पड़ती है, जिससे लागत मूल्य बढ़ जाता है।
इन समस्याओं के कारण बुनकर समाज लाभ से वंचित है। इस स्थिति को बदलने के लिए सरकार और अन्य हितधारकों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है।