आज से शुरू हो रहा लोकआस्था के महापर्व छठ के चार दिवसीय अनुष्ठान का शुभारंभ

जहानाबाद
नहाय खाय के साथ मंगलवार से लोक आस्था का महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान शुरू हो रहा है। अगले दिन बुधवार को लाेहंडा होगा और गुरुवार को अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को प्रथम अर्घ्य दिया जाएगा। शुक्रवार की सुबह उदीयमान सूर्य के अर्घ्यअर्पण के साथ ही चार दिवसीय महापर्व का समापन हो जाएगा। महापर्व को लेकर व्रतियों वाले घरों में तैयारियों को सोमवार को लोग अंतिम रूप देते रहे। नहाय खाय को ले बाजारों में कद्दु व चना दाल के अलावा नया अरवा चावल की मांग काफी बढ़ी रही। कद्दु के दाम तो बाजार में आसमान छूते रहे। एक-एक कद्दु अस्सी से लेकर 150 रुपए तक में बिके। इधर पर्व को लेकर हर जगह पवित्रता का माहौल कायम हो गया है। दरअसल छठ एक ऐसा महापर्व है, जिसमें न सिर्फ व्रती बल्कि जिनके घरों में व्रत नहीं होता है वह भी इसके नियम का पालन करते हैं। यही कारण है कि गैरव्रती भी छठ पूजा की उपयोग सामग्री मूली, कद्दू, फल, ईंख, पानी सिंघाड़ा आदि को व्रत संपन्न होने तक ग्रहण नहीं करते हैं और घर के बच्चों को भी उक्त चीजों को खाने से मना करते हैं। श्रद्धापूर्वक गैरव्रती के परिजन भी व्रतियों की सेवा में जुटे रहते हैं। उनकी जरूरतें पूरी करने में लगे रहते हैं। घाटों पर उनके कपड़े तक धोते हैं। थाना रोड स्थित काली मंदिर के प्रमुख पुजारी जनमेजय मिश्रा कहते हैं कि छठ एक ऐसी पूजा है, जिसमें न मंदिर की जरूरत होती है और न ही मूर्ति पूजा आवश्यक है। वस्तुत: इसमें प्रकृति की पूजा खुले अम्बर के तले प्रकृति प्रदत चीजों से की जाती है। इस व्रत में मिट्टी के चूल्हे का विशेष महत्व है। महिलाओं ने बताया कि छठ का प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर ही बनाया जाता है। चूल्हे में आम की लकड़ी की अग्नि जलती है। धार्मिक अनुष्ठान में मिट्टी का चूल्हा और आम की लकड़ी को पवित्र माना गया है।
