बरावा में नव निर्मित शिव मंदिर परिसर में पांच दिवसीय रुद्र महायज्ञ का हुआ आयोजन


काको(जहानाबाद)
काको प्रखंड के बरावा में नव निर्मित शिव मंदिर परिसर में पांच दिवसीय रुद्र महायज्ञ एवं श्रीरामचरितमानस कथा का आयोजन हुआ। इसके अंतिम दिन विधि विधान पूर्वक नवनिर्मित मंदिर के गर्भ गृह में शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा की गई। गांव निवासी संवेदक अमरेंद्र कुमार के सौजन्य से निर्मित भव्य मंदिर में शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा के बाद गांव समेत आसपास के गांव के बड़ी संख्या में लोग पूजन अर्चन के लिए उमड़ पड़े। लोगों ने श्रद्धा भाव से भगवान शिव की पूजा की। इसके बाद भव्य भंडारा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इधर, रुद्र महायज्ञ के अंतिम दिन गुरुवार को कथा व्यास विश्वनाथ जी महाराज ने शिव-पार्वती संवाद के माध्यम से भगवान श्रीराम के अवतार के गूढ़ रहस्यों को उद्घाटित किया। कथा की शुरुआत श्रद्धा (पार्वती) और विश्वास (शिव) के मिलन से हुई, जिसके परिणामस्वरूप पुरुषार्थ (कार्तिकेय) और विवेक (गणेश) का जन्म हुआ। उन्होंने कहा कि यही पुरुषार्थ अंधी श्रद्धा रूपी तारकासुर का अंत करता है। नकली धर्म और समाज में फैली कुरीतियों को समाप्त करने के लिए विवेक और पुरुषार्थ जरूरी है। कहा कि पार्वती जी ने भगवान शिव से श्रीराम के अवतरण से संबंधित 14 प्रश्न किए। इसके उत्तर में भगवान शिव ने कहा कि भगवान के अवतार के कई कारण हैं, लेकिन रामचरितमानस में पांच प्रमुख कारण बताए गए हैं। रावण ने मानव निर्माण की व्यवस्था यज्ञ, कथा, धर्म और पूजा को नष्ट कर दिया था। उसका उद्देश्य था मानव को पशु बना देना। रावणत्व के इस प्रभाव से मुक्ति हेतु पृथ्वी भगवान विष्णु की शरण में गई और भगवान ने वचन दिया कि वे मनुष्य रूप में अयोध्या में राजा दशरथ के घर जन्म लेंगे। कहा कि जो समाज को रुला दे, वही रावण है और जो उस रावणत्व का अंत करे, वही राम है। कथा का उद्देश्य समाज में रामत्व की स्थापना और रावणत्व का उन्मूलन है।


