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जहानाबाद में गूँजी कविताओं की स्वर लहरियाँ, युवाओं ने थामी समाज निर्माण की कलम







*जहानाबाद के युवा बोले कलम की ज़ुबान, समाज निर्माण का दिया संदेश*
*जहानाबाद में गूँजी कविताएँ, युवा कलम ने जगाई नई उम्मीद*
*जहानाबाद की नई पहचान*
इस सम्मेलन ने जहानाबाद को साहित्यिक मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है। आयोजन ने यह संदेश दिया कि कलम की ताक़त से समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है और जब युवा साहित्य की ओर बढ़ते हैं तो संस्कार और जागरूकता का दीप और प्रज्वलित होता है।
यह आयोजन केवल कवि सम्मेलन नहीं बल्कि जहानाबाद के साहित्यिक पुनर्जागरण का उद्घोष साबित हुआ
