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जहानाबाद में गूँजी कविताओं की स्वर लहरियाँ, युवाओं ने थामी समाज निर्माण की कलम



*जहानाबाद के युवा बोले कलम की ज़ुबान, समाज निर्माण का दिया संदेश*

*जहानाबाद में गूँजी कविताएँ, युवा कलम ने जगाई नई उम्मीद*

जहानाबाद 
जहाँ एक ओर देश के विभिन्न हिस्सों में युवा वर्ग मोबाइल और नशे की गिरफ्त में भटक रहा है, वहीं जहानाबाद में युवाओं की एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। यहाँ साहित्य के प्रति युवाओं का रुझान बढ़ रहा है और इसी क्रम में विराट युवा कवि मंच के बैनर तले लगातार चौथे वर्ष विराट युवा कवि सम्मेलन जहानाबाद भाग-4 का भव्य आयोजन किया गया।

कृष्णा गार्डन में आयोजित इस कार्यक्रम में बिहार और आसपास के जिलों से आए 50 से अधिक युवा साहित्यकारों ने 25 वरिष्ठ साहित्यकारों के साथ मंच साझा करते हुए अपनी कविताओं का प्रभावशाली पाठ किया। युवाओं की ओजपूर्ण कविताओं और ग़ज़लों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

आयोजन समिति

इस सफल आयोजन में समिति के सम्मानित सदस्य सुभाष शर्मा, विक्रम जी, श्री बिट्टू भूमि, श्री लड्डू बाबू लड्डू, श्री शुभम, श्री ओम, श्री सुमन सौरभ सोनू, श्री सन्नी वत्स, श्री राहुल राज, श्री राहुल कुमार, श्री बालमुकुंद, श्री नारायण (उर्फ छोटे सरकार), श्री राकेश रौशन, श्री कुंदन कुमार, श्री गौरव शर्मा, श्री राहुल वत्स, श्री पीयूष राज, श्री रजनीश कुमार, श्री अभिषेक कुमार (उर्फ हनी), श्री दीपक कुमार उर्फ विधायक जी ,रौशन कुमार, अमन कुमार, राहुल रंजन, आशुतोष कुमार और अनूप कुमार सहित कई अन्य लोगों की विशेष भागीदारी रही।

विशिष्ट अतिथि

युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए इस अवसर पर पूर्व सांसद डॉ. अरुण कुमार, वरिष्ठ पत्रकार संतोष श्रीवास्तव, समाजसेवी अशोक कुमार, लोकप्रिय नेता निरंजन केशव प्रिंस, लोकप्रिय जननेता रितेश कुमार उर्फ चुन्नू जी, रंगनाथ दिवाकर और रविशंकर शर्मा उपस्थित रहे। सभी ने युवाओं के इस प्रयास की सराहना की और इसे जहानाबाद ही नहीं बल्कि पूरे बिहार के लिए गौरव का विषय बताया।

समाज निर्माण का संदेश

कार्यक्रम में प्रस्तुत कविताओं ने स्पष्ट किया कि जहानाबाद का युवा केवल व्यक्तिगत भविष्य की चिंता में नहीं उलझा, बल्कि अपनी लेखनी से समाज को जागरूक करने और नई दिशा देने में सक्रिय है। रचनाओं में प्रेम, प्रकृति और जीवन दर्शन के साथ-साथ भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी, नशाखोरी जैसी सामाजिक समस्याओं पर भी तीखे सवाल उठाए गए।

जहानाबाद की नई पहचान

इस सम्मेलन ने जहानाबाद को साहित्यिक मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है। आयोजन ने यह संदेश दिया कि कलम की ताक़त से समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है और जब युवा साहित्य की ओर बढ़ते हैं तो संस्कार और जागरूकता का दीप और प्रज्वलित होता है।

यह आयोजन केवल कवि सम्मेलन नहीं बल्कि जहानाबाद के साहित्यिक पुनर्जागरण का उद्घोष साबित हुआ

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