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*ज़िंदगी में होनी रफ़्तार बाकी है*

*ज़िंदगी में होनी रफ़्तार बाकी है*
थमी सी शाम, खामोश किनारा,
पेड़ों की छांव में ढलता सवेरा।
पर दिल कहता – ये तो बस एक पड़ाव है,
सपनों की उड़ान में अभी कई उड़ानें बाकी हैं।
संगीत सा बहता हर एक लम्हा,
हर धड़कन में कोई इम्तहान बाकी है।
जो खो गए थे राहों में कहीं,
उनसे मिलने का इकरार बाकी है।
थकना मना है, रुकना नहीं,
इस दिल में अभी तूफ़ान बाकी है।
हर मोड़ पे कहती है ये बहार –
‘ज़िंदगी में होनी रफ़्तार बाकी है।’
🌿 || Rohini || 🌿

