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काश पापा आज साथ होते


काश पापा आज साथ होते
काश… पापा आज साथ होते,
तो सावन की हरी चूड़ियाँ,
सुहाग की पुड़िया,
सबका एक सच्चा आश होता।
कहने को तो… हर कोई अपना होता,
पर पापा की जगह…
तो कुछ खास होता।
पूरा महीना बीता अपनों की तलाश में,
अपना होना भी…
एक अलग एहसास होता।
पूछो हम जैसे लोगों से,
जिनके भाई या पापा साथ नहीं होते,
जो रोते बिताते हैं पूरा सावन,
और रक्षाबंधन भी…
उदास होते।
काश… पापा आज साथ होते।
🌺 रोहिणी 🌺