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मेरे महाकाल त्रिनेत्रधारी है

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मेरे महाकाल त्रिनेत्रधारी है
सबका भला करते भोले भंडारी है
मेरे महाकाल त्रिनेत्रधारी है
शिप्रा नदी के पावन तट पे
औघड़दानी बसते है
मेरे बाबा मस्त मलंग
सबके दुखड़े हरते है
उज्जैन नगरी लगे कितनी प्यारी
मेरे महाकाल त्रिनेत्रधारी है
सबका भला करते भोले भंडारी है
कालों के काल है महाकाल
सारे जग ने इसको है माना
महाकाल का दर्शन करना
अगर मोक्ष तुझको है पाना
चिताओं की भस्म लगे इनको न्यारी
मेरे महाकाल त्रिनेत्रधारी है
सबका भला करते भोले भंडारी हैं
मेरे महाकाल त्रिनेत्रधारी है
रचना परिंदा जहानाबादी उर्फ बलिराम प्रसाद स्वर्णकार
