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दोस्तों ! हार मत मानना कभी



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दोस्तों हार मत मानना कभी
क्योंकि डर के आगे जीत है
लक्ष्य को उसी ने भेदा जिसमें
सच्ची लगन और प्रीत है
दोस्तों! हार मत मानना कभी
क्योंकि डर के आगे जीत है
असफलता से सीखो, विचार करो
प्यारे! पुनः कोशिश एकबार करो
आए चुनौतियां  आए बाधाएं
डटकर मुकाबला मेरे यार करो
ज़िंदगी चलने का नाम है
जो रुक गया उसका न कोई मीत है
लक्ष्य को उसी ने भेदा जिसमें
सच्ची लगन और प्रीत है
दोस्तों! हार मत मानना कभी
क्योंकि डर के आगे भी है
जिन्हें होती हैं गौहर की तलाश
लगाते है गहरे पानी में गोता
गर हार मान जाते अब्दुल कलाम
तो भारत को मिसाइल पुरुष कौन देता
जो ठान लेना  करके ही दम लेना
कहता यहीं मेरा जीत है
लक्ष्य को उसी ने भेदा को जिसमें
सच्ची लगन और प्रीत है
दोस्तों हार मत मानना कभी
क्योंकि डर के आगे जीत है
  रचना परिंदा जहानाबादी उर्फ बलिराम प्रसाद स्वर्णकार

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