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अर्पित है मेरे शब्द सुमन”: कविताओं का सुंदर गुलदस्ता है



कवि डॉ  सुबोध कुमार झा ने अपने काव्य संग्रह “अर्पित हैं मेरे शब्द सुमन” में अलग अलग विषयों को चंद शब्दों में खूबसूरती से प्रस्तुत किया है । हर कविता पाठक को अलग दृष्टिकोण से विचार करने को मजबूर करती है |

पहली कविता एक प्रार्थना के रूप में गुरु को समर्पित है । गुरु बिन ज्ञान कहाँ से पावूँ,दी जो ज्ञान हरि गुण गावूँ, परम्पराप्राप्तमयोगम संभव सिर्फ़ गुरु के आशीर्वाद से होता है |

ढाई अक्षर का संवाद ,ढाई अक्षर प्रेम की परिभाषा को अलग अलग उदाहरणों से उकेरता है | सर्वोत्तम उदाहरण है “अंधे माँ बाप को कंधों पर लिए बोझ की तरह नहीं अपने सौभाग्य के रूप में “ आज के युग के समाज को इस कड़ी को समझने ज़रूरी है | इस प्रयास में लेखक बधाई के पात्र हैं |
“मौत को क़रीब से देखा” एक निष्पक्ष जीवन की सच्चाई को दर्शाता है | इस कविता की उत्तम कड़ी है “ ग़ैरों में अपनापन पलते और अपनों को आँखें चुराता देखा है “| इस हालात में जीते जी मौत को लेखक ने क़रीब से देखा है |
“पितृ दिवस”सिर्फ़ पिता के नाम से मनाने का दिन नहीं| “ पिता के प्रति श्रद्धा और आस्था किसी एक दिवस का मोहताज नहीं | ये रिश्ता किसी स्वार्थ से संचालित नहीं | बहुत ही वास्तविक व्याख्या है |
“ करोना संहार सुनिश्चित है में दिल छूने वाली पंक्तियां हैं: “ करोना के दो लहरों ने मचा दी तांडव”। एक हक़ीक़त , पुनर्स्थापना कर दी कुदरत ने कि कोई शास्वत नहीं होता , जिसकी समझ इंसान को ज़रूरी है |
“ माँ,तुम याद आती हो “ माँ के प्रति एक जज्बाती कविता है जो रूह को छूनेवाली है।
“ तुम रूठे ही रहे किशन”  एक जज्बाती एहसास मगर एक आशावादी कविता है कि किशन ज़रूर आयेगा बेड़ा पार करने |
“ ज़िन्दगी के रंग” जीवन के हर रंग को चित्रित करता और गिरगिट से भी तेज बदलते रंगों का वर्णन किया है कवि ने बहुत ही बेहतरीन रूप से |
“ पैंतीस वसंत की अलग रवानी” जीवन के विविध वसन्तों में नैया पार कराती, आँधियों से अपनों का साथ और इन मुश्किल घड़ियाँ अपनों की पहचान भी करा देती |
“ अलविदा गुज़रते वर्ष “ में गुज़रे वर्ष के कड़वे यादों को वहीं दफ़नाकर नव वर्ष के आशा को जागनेवाला प्रयास है |
“नये वर्ष की नई कहानी “ गुज़रे कष्टभरे  वर्ष के बाद आशा ,उमंग और उत्साह से रमते जाने का संदेश है |
“घना कोहरा” नैन बेचारे बाहें पसारे गुलाबी मौसम का एहसास ,अति उत्तम प्रस्तुति है |
“होली का संदेश” उल्लास ,उमंग और उत्साह से भरा रंगों का त्योहार है।  जीवन मे हर रंग के व्यक्ति और अवसर मिलते हैं जिन्हें बिंद्वेश अपनाकर प्यार फैलाना ही होली है |
“जन्म दिन मनाना तो एक बहाना “ जैसे उम्र बढती , अनुभव के साथ नई दिशा देती, बची ज़िंदगी को बिताने की सीख लेकर बढ़ेंगे तो जीवन बिताकर जाएँगे वरना जीवन गवाकर जाओगे |
“ ज़िंदगी को जी के तो देखो” मे जीवन के हर मोड़पर एक अलग अजीब शृंखलाओं महसूस कर सको तो जीवन को अलखण्डता से जी सकोगे , एक मार्गदर्शक कविता है।
“तेरा कोहरा चेहरा” जो आँखों में आई थी और फिर उतर आई ,बीच समय में मिली सिल्कन कुर्ता, फिर भी न भूल सका तेरा कोहरा चेहरा , अत्यंत भावुक प्रस्तुति है |
“दीवारों की सफेदी”  बदलते वातावरण को चित्रित करती है। हवा का झोंका, धुंधली हो चली दीवारों की सफेदी | बदलते समय का असर ज़िन्दगी में ,बहुत खूबसूरत प्रस्तुति  है|
“तुम चाँद तो हो” पूर्णिमा और अमावस्या में झूमते जीवन कभी बादलों में छुपकर, कभी घूँघट फाड़कर सुअवसर और जीवन के मजबूरी का वर्णन अति उत्कृष्ट प्रस्तुति |
“ पूनम की रात में” पूनम की हसीन रात और उनमे परेशानियों का दौर का वर्णन,हल्की फूलकी प्रस्तुति है |
“ कि मैं जुदाई पी रहा हूँ” हसीन यादगार लम्हों को यादकर वास्तविकता का स्वरूप जानकर एक दर्दनाक प्रस्तुती की |
“ तनहाइयाँ बहने लगी है रक्त मे” एक तनहाइयों की तड़प की जुबानी है |
“ चाँद ना लाने के एवज़ में”  एक लाचार पिता की व्यथा की भावपूर्ण प्रस्तुति है |
“ नया वर्ष ,नूतन हर आशा” एक सकारात्मक कविता है जिसमें सत्य का ज़िक्र है और राहत की राह भी है कि जिजीविषा,अदम्य साहस से हर मुश्किल आसान हो जाती  है|
“रिसते सवाल”  इस युग के बदलते नज़रिया और स्वरूप की प्रस्तुति  है|
“ लो घिर आई आज फिर  …..” में अपने प्रिय पिता को स्मरण करने के साथ साथ उनके प्रति उत्कृष्ट श्रद्धांजली है |
“ हिंदी और हम” में कवि का भाव है कि हिंदी सिर्फ़ एक भाषा या संपर्क का साधन नहीं बल्कि हमारी संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है |
हिंदी की सशक्तता को पहचानना अपने आप को पहचानने का माध्यम है |
“अनुराग की सीमा” प्रेम की मजबूती और ताक़त का अहसास करती है ।  सच्चे प्रेम को आघात  विचलित नहीं कर  सकती।सहनशीलता अपरंपार होती है।
“ ख्वाबों के नाखून” में एक दर्द, असहाय मरीज़ की पुकार है। किसी की याद बेतरह सता रही है कवि को।
“यादों का नश्तर”   उस मानसिक स्थिति के बारे में है कि कड़वे यादों को बार बार याद करने से ये और बुलंद होते  हैंऔर ज़िन्दगी को क़यामत की ओर ले जाते | कुशल जीवन के लिए ऐसे यादों को भूलना ही बेहतर होता |

संक्षेप में “अर्पित हैं मेरे शब्द सुमन” एक बेहतरीन विचारों की माला है जिसमे विविध प्रकार के सुमन को इस तरह बुना है कि इन्हें पढ़ते समय   समय बीतने का अहसास नहीं होता। कविताओं की जोड़ उम्दा रीत से किया है । डॉ . सुबोधकुमार झाजी की जितनी भी प्रशंसा की जाए कम ही होगी।
मैं कवि को खूब बधाई देता हूँ कि वे और भी प्रेरित होकर ऐसे सुंदर गुलदस्तों को प्रस्तुत करते रहें।

टी एन सी श्रीधर
बैंगलोर


पुस्‍तक परिचय
शीर्षक: अर्पित है मेरे शब्द सुमन
विधा: काव्‍य संकलन
कवि: डॉ० सुबोध कुमार झा
प्रकाशक: प्रिन्‍सेप्‍स पब्लिशिंग
मूल्‍य: ₹ 99/-
ISBN: 978-81-984900-4-9

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