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खादी मॉल, पटना में प्रदर्शनी का सफल समापन**  **पद्मश्री सम्मानित श्रीमती दुलारी देवी ने कलाकारों को किया सम्मानित



**“खादी मॉल में एहन आयोजन से कलाकार सबके नय खाली मंच मिलई छै, बल्कि खूब प्रोत्साहन और आगां भविष्य के खातिर सही दिशा और बढ़ावा भी मिलेई छै।”** – पद्मश्री दुलारी देवी 

पटना, 23 फरवरी 2025: बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड, बिहार सरकार द्वारा आयोजित **मधुबनी साड़ी प्रदर्शनी सह बिक्री केंद्र** का आज **खादी मॉल, पटना** में भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर **मधुबनी, बिहार निवासी पद्मश्री सम्मानित कलाकार श्रीमती दुलारी देवी** मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने उत्कृष्ट लाइव डेमो प्रस्तुत करने वाले कलाकारों को **प्रशंसा प्रमाण पत्र** प्रदान कर सम्मानित किया। 

इस अवसर पर पद्मश्री दुलारी देवी ने कहा, **”खादी मॉल में एहन आयोजन से कलाकार सबके नय खाली मंच मिलई छै, बल्कि खूब प्रोत्साहन और आगां भविष्य के खातिर सही दिशा और बढ़ावा भी मिलेई छै।”** 

यह आयोजन **15 फरवरी से 23 फरवरी 2025** तक चला, जिसमें बिहार के विभिन्न जिलों से आईं कलाकार **सुप्रिया सिन्हा, ममता झा, वंदना कुमारी, अंशु कुमारी, सीमा कुमारी, पूजा झा** ने पूरे **9 दिनों तक** मिथिला पेंटिंग की उत्कृष्ट लाइव डेमो प्रस्तुत की। 

इस प्रदर्शनी का उद्देश्य **बिहार की विश्वप्रसिद्ध पारंपरिक   मिथिला कला को बढ़ावा देना** और **मधुबनी साड़ियों के कारीगरों को एक मंच प्रदान करना** था, जहां वे अपनी उत्कृष्ट कारीगरी को लाइव डेमो के माध्यम से प्रदर्शित कर सकें और बिक्री भी कर सकें। इस पहल के तहत **मधुबनी चित्रकला से सजी साड़ियों को लोगों ने अत्यधिक सराहा**, और बड़ी संख्या में खरीदारों ने अपनी पसंद की साड़ियों पर **मिथिला पेंटिंग करवाकर खरीदारी** की। 

**बोर्ड के सहायक लेखा पदाधिकारी श्री अभय सिंह** ने कहा, **”इस प्रदर्शनी को ग्राहकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। इसमें स्थानीय उपभोक्ताओं के साथ-साथ मॉल में आए अन्य राज्यों से भी ग्राहकों ने भाग लिया। इस आयोजन ने न केवल बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा दिया, बल्कि स्थानीय कारीगरों और बुनकरों के आर्थिक सशक्तिकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।”** 

**वहीं समापन अवसर पर मॉल के प्रबंधक श्री रमेश चौधरी** ने कहा, **”बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड आगे भी इस तरह के आयोजनों के माध्यम से खादी और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने और स्थानीय कारीगरों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा।”**

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