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——रमेश ‘कँवल’,बिहार प्रशासनिक सेवा के सेवा निवृत पदाधिकारी द्वारा रविवरीय अंक के लिए संकलित—–

🌷कालजयी घनश्याम, नई दिल्ली की ग़ज़ल🌷

खेल में खेल कर गया कोई

ठोकरों से बिखर गया कोई
ठोकरों में सुधर गया कोई

जिंदगी बाग़ बाग़ होते ही
मुश्किलों से गुज़र गया कोई

मान सम्मान सब गया उसका
आँख से जब उतर गया कोई

देख शर्मो-हया निगाहों में
आइने में सॅंवर गया कोई

नाम यश मेरे पीछे आ पहुंचे
ज्ञान भंडार भर गया कोई

राम आते है तारने उनको
पंख जिनके कतर गया कोई

कौन ‘घनश्याम’ को बचाएगा
खेल में खेल कर गया कोई

✍ कालजयी घनश्याम
नई दिल्ली

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