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——रमेश ‘कँवल’,बिहार प्रशासनिक सेवा के सेवा निवृत पदाधिकारी द्वारा रविवरीय अंक के लिए संकलित—–

देवेन्द्र माँझी ,द्वारिका,दिल्ली की ग़ज़ल

हमसे ये इन्तिज़ार कैसे हुआ

बेसबब उनसे प्यार कैसे हुआ
दिल ये बे-इख़्तियार कैसे हुआ

मुझको जोशे-जुनूं में क्या मालूम
पैरहन तार-तार कैसे हुआ

क्या बताएँ तुम्हें ज़मीं वालो
आस्मां अश्कबार कैसे हुआ

जिसमें पतझड़ क़ियाम करता था
वो चमन लालःज़ार कैसे हुआ

एक लम्हा भी इस क़दर था गिरां
हमसे ये इन्तिज़ार कैसे हुआ

घर से तन्हा निकालकर मुझको
शहर ये सोगवार कैसे हुआ

नाव मझधार में थी जब “माँझी”
इस समुन्दर से पार कैसे हुआ
–देवेन्द्र माँझी
9810793186

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