देशबिहारराज्यलोकल न्यूज़
——रमेश ‘कँवल’,बिहार प्रशासनिक सेवा के सेवा निवृत पदाधिकारी द्वारा रविवरीय अंक के लिए संकलित—–

रमेश ‘कँवल’, पटना की ग़ज़ल
दिल ये चकना चूर हुआ
आँखों से जब दूर हुआ
दिल ये चकना चूर हुआ
कुछ ऐसा मसरूफ़ रहा
रिश्ता हर बेनूर हुआ
घर के भीतर देख उसे
इक चेहरा रंजूर हुआ
झुक कर मिलता था सबसे
बन्दा जो मशहूर हुआ
शोहरत, दौलत, इज्ज़त पा
मुख़लिस से मग़रूर हुआ
दफ़्तर आंधी पानी में
जाने को मजबूर हुआ
देश में हिन्दू मुस्लिम को
लड़वाना दस्तूर हुआ
शक की बस्ती मौज में है
मज़हब प्रेम से दूर हुआ
देख पडोसी की मस्ती
यार ‘कँवल’ मसरूर हुआ


