चार दिवसीय महापर्व छठ पूजन सम्पन्न


जहानाबाद
लोक आस्था का महापर्व सनातन धर्म में छठ पूजा का विशेष महत्व है।पौराणिक कथाओं के अनुसार इस पूजा की शुरुआत सूर्य पुत्र और महान योद्धा कर्ण ने की थी, मान्यता है कि इस सूर्यदेव और छठी मईया की पूजा अर्चना करने से निसंतान कों संतान की प्राप्ति होती है एवं संतान प्राप्त दम्पति अपने परिवार सह संतान की सुख समृद्धि व दीघार्यु का आशीर्वाद प्राप्त होने की कामना करती है,क्यों दी जाती है डूबते हुए सूर्य कों अर्घ्य,ऐसी मान्यता है की शाम के समय सूर्य देवता अपनी अर्धांगिनी देवी प्रत्युषा कों समय देते है,यही कारण है की छठ पूजा में शाम कों डूबते हुए सूर्य कों अर्घ्य दिया जाता है,श्रधांलू घाट पर जाने से पहले बांस की टोकरी में पूजा की सामाग्री,मोशमी फल,ठेकुआ, कसर,गन्ना,पानी नारियल आदि से सामान सजाते है और इसके बाद घर से नंगे पैर घाट पर पहुंचते है,छठव्रती घाट पर जाने के दौरान दण्डवत करते हुए अपनी मनोइक्षा प्रकट करती है,इसके बाद स्नान कर डूबते सूर्य कों अर्घ्य देते है,छठ पूजा पहला ऐसा पर्व है जिसमें डूबते सूर्य भगवान भाष्कर की पूजा की जाती है और उन्हें अर्घ्य दिया जाता है,इस पावन पर्व कों बहुत ही शालीनता,सादगी और आस्था से मनाये जाने की परम्परा है |