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आजु चइत हम गायब हो रामा…प्रो0 (डॉ0 )उमाशंकर सिंह सुमन ।


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चैत्र (चैत ) मास हिन्दू पंचांग का पहला महीना है । फाल्गुन के बाद यह मास बहुत ही महत्वपूर्ण है । धार्मिक ,सामाजिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से भी इस माह का अपना महत्व है । इसी माह में हिन्दू नववर्ष का श्रीगणेश होता है । चैत नवरात्रि-सूर्य और देवी की उपासना का लोकपर्व भी मनाया जाता है । अवतारवाद की परंपरा में भगवान विष्णु के पहले अवतार *मत्स्यावतार* का अवतरण हुआ था ।
मधुमातल बहे बयार महिनवा फागुन के बाद चैत के बहार में चैता लोकगीत कि झंकार सुनाई पड़ती है ।आम्र मंजर टिकोरा बनकर आम्र कुंजो  की शोभा बढ़ाने लगजातेहैं ।
             बिहार की लोक भाषाओं में चैत गीत चैत मास में  गुंजयमान  होते रहते है । मगही में इस गीत को *चैतार*  ,भोजपुरी में घाटो और मैथिली में चैतावर कहा जाता है । हो रमा ,आहो रामा की मधुर सुर -लय से मन-प्रान्त झूम उठता है । मगध का चैता लोकगीत अपने लोक धुन में जनमन के मन प्राण को अपनी ओर बरबस आकर्षित करते हैं । कीर्तन मंडलियों के सामूहिक गायन से स्निग्ध रात्रि का वातावरण सरस -सजीव हो उठता है । जब ढोलक ,झाल   के थाप से संगत कर मधुर स्वर संगीत लोक स्वर में फूटता है — आजु चइत हम गायब हो रामा ,येही ठइया ..
येही जा के ठईया ,सुमिरी भगवान , अहो रामा
आजु चइत हम गायब ही रामा येही ठईया …
अहो रामा पहिले मनाव आदि भवानी हो रामा ..
      चैता गीत प्रारंभ करते समय सर्वप्रथम यही गीत गाया जाता है । यह चैता सुमिरण गीत है । हे राम ,सर्वप्रथम आदि शक्ति भवानी को स्मरण करो तब हमें आज यहाँ चैता गीत  प्रारम्भ करना चाहिए । सुमिरण का एक गीत यह भी ..
ये रामा सुरसती मतवा जोरीला दुनो हथवा ये रामा
कंठे सुरवा ,कंठे सुरवा होव न सहइया  हो रामा कंठे सुरवा ..।
     चैत गीत मुख्यरूप से भक्तिपरक एवं श्रृंगारपरक होते है । भक्तिपरक चैता गीत की कुछ बानगी —
रामजी के बनवा पैठवल हो रमा ,कठिन तोरा जियरा ।
बसिहे न अवध नगरिया हो रामा ,कठिन तोरा जियरा ।
राम लखन बिना सुना हो रामा ,कठिन तोरा जियरा ।
   चैत गीत की मादकता श्रृंगाररस में बह उठता है –
चांदनी चितवा चुरावे हो रामा , चैत के रतिया
मधुर रितु , मधुर रस घोरे , मधुर पवन अलसावे हो रामा   
   नायिका की गोरी -गोरी बाहों पर हरी -हरी चूड़ियां शोभ रही है और ललाट पर ईंगुर की बिंदी सुशोभित हो रही है —
ये रामा गोरे -गोरे बहिया  पर हरी -हरी  चूड़ियां हो रामा
लिलरा पर सोभे ला ईंगुर के बिंदिया हो रामा …..
एक बहन की शिकायत  है कि हमारे पिताजी रहते तो हमारे  लिए सुंदर वर खोजकर विवाह करते । मेरे भाई ने पागल वर खोज दिया है -ये रामा बाबा मोरा रहतन सुंदर  वरवा खोजतन हो रामा
भइया मोरा खोजलन वर बउरहवा हो रामा…
लोक मे चैता के मनमोहक सैकड़ो गीत भरे पड़े है जो लोककंठ में विराजमान होकर लोक को अनुरंजित करते हैं । यह भी सच है कि लोकजीवन में शहरीपन अपसंस्कृति  ,फिल्मी गीत , पापसंगीत और रीमिक्स के कोलाहल के बीच चैता गीत लोकस्वर में आज भी जीवित है ।यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी  कि  भारतीय लोकसंस्कृति की आत्मा लोक संगीत में बसती है । ●●

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