रमजान के महीने में रहमत के दरवाजे खुल जाते हैं-मौलाना जीशान हैदर

*बदनसीब है वह जिसने माहे रमज़ान को पाया और अपने रब को राजी न कर सका*
अलीनगर पाली (काको)जहानाबाद
जहानाबाद जिले के अलीनगर पाली में स्व.सैयद मुस्तफा इमाम के आवास पर अफतार और मज़लिस का आयोजन किया गया।बता दूं के रमज़ान का पाक महीना चल रहा है। इस महीने को बरकतों का महीना कहा जाता है इस महीने में मुसलमान भाई 30 दिन रोजा रखते हैं और संध्या को अफतार करते हैं। इस अवसर पर स्व.सैयद मुस्तफा इमाम के परिवार के द्वारा अफतार का आयोजन किया गया।उसके बाद उनके आवास पर मजलिस का आयोजन भी हुआ मालूम हो कि रमजान महीने की 21तारीख को मोहम्मद साहब के दामाद हज़रत अली अलैहिस्सलाम को शहीद किया गया था जिसकी याद में मज़लिस का आयोजन और ताबूत बरामद किया गया।मज़लिस का तकरीर गया जमा मस्जिद के ईमाम मौलाना सैयद जीशान हैदर ने किया।
तकरीर करते हुए कहा कि इस्लाम के मुताबिक रमजान महीने के दूसरे अशरे (हिस्सा) मगफिरत अर्थात अल्लाह से अपने गुनाहों से माफी का आज 21 रोजा चल रहा है, जो भी मुसलमान रमजान के रोजे रखता है। सच्चे दिल से अपने गुनाहों का प्रायश्चित करता है।
अल्लाह उसके सारे गुनाहों को माफ कर देता है। रमजान के महीने में रहमत के दरवाजे खुल जाते हैं। इस अशरे में गुनाहगारों की तौबा (माफी) कुबूल की जाती है। उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म के प्रवर्तक हजरत मोहम्मद ने फरमाया वह शख्स बदनसीब है जिसने माहे रमजान को पाया और अपने रब को राजी न कर सका।
मौलाना ने लोगों को इस महीने की फजीलतों से रूबरू कराया वही हजरत अली (अ.स.) के शुजात और दुनिया में किए गए इंसानियत के पैगाम को सुनाया उन्होंने कहा की यह महीना अपने गुनाहों को माफ करवाने का महीना है अपने आसपास गरीबों की मदद करें ऐसे तो हर दिन अल्लाह का दिन है और हमेशा इंसानियत के रास्ते पर चलें लेकिन रमजान में अल्लाह अपने बंदों पर जायदा मेहरबान होता है। मज़लिस की शुरुआत सैयद मोहम्मद अब्बास ईमाम, वफी हसन, अली ईमाम और सैयद मुबारक हसन की तकरीर से हुआ।वही आफतार और मज़लिस में दर्जनों लोगों ने शिरकत किया।

