बालम केसरिया मोहे रंग लगा।


बालम केसरिया मोहे रंग लगा।
जनमो जनम छुड़ाए न छूटे, ऐसे रंग बेढंग लगा ।
बालम केसरिया मोहे रंग लगा।
❤️
एक तो प्रीत की रंग चढ़ाओ, दूजे गाल पे लाल लगाओ
तीजे पिचकारी भर भर के, सतरंगी चुनरी को बनाओ
झूमूं नाचूं होके मगन मैं, ऐसे प्रीत का भंग पिला।
बालम केसरिया मोहे रंग लगा।
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जैसे लगाया राधा प्यारी को, जैसे लगाया मीरा बाई को
जैसे लगाया कुंज गली में, तन-मन अर्पण बृजवासी को
वैसे अपने चरण प्रीतम, मेरे मन मलंग लगा ।
बालम केसरिया मोहे रंग लगा।
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धोबिया धोबे सातो जनम, दाग ही मेरे पुण्य करम
ये रंग मेरा सोलह सिंगार, इस रंग में नहीं कोई शरम
हृदय बसे जैसे प्राण प्यारी, वैसे अपने अंग लगा ।
बालम केसरिया मोहे रंग लगा।
💚
रंग लगाओ ओ दबंग,पकड़ो कलाई खींचों भुजंग
अपने ही रंग में मोहे तू रंग दे, लागी ना छूटे तुझसे लफंग
आनंद कंद हे चतुरानन, अपने नाम की जंग चढ़ा।
बालम केसरिया मोहे रंग लगा।
💚💙💜❤️
सावित्री सुमन।