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फोटो भगवान तो सिर्फ भक्ति भाव के भूखे हैं. उन्हें धन नहीं चाहिए,




अरवल, तेजपुरा गांव में आयोजित  श्रीमदभागवत कथा ज्ञान यज्ञ में व्यास पीठ पर विराजमान स्वामी रामप्रपन्नाचार्य जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न लीलाओ के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया.  आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन की कथा में पंडाल में उपस्थित भक्तों को प्रवचन देते हुए कहा कि भगवान तो सिर्फ भक्ति भाव के भूखे हैं. उन्हें धन नहीं चाहिए, समय पर भगवान का भजन कर लेने से ही भगवान प्रसन्न हो जाते है. भगवान के लिए सब समान है. भगवान जब भेदभाव नही करते तो आज के समय मे आम लोग क्यो भेदभाव करते है. इनसे सीख लेने का संदेश दिया. उन्होंने प्रेम को बढ़ावा देते हुए घमंड और विश्वास के साथ धोखेबाजी से दूर रहने की सलाह दी. श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से मानव जीवन के उद्देश्यों से परिचित कराया जा रहा है. उन्होंने पूतना बध प्रसंग कि कथा सुनाया. और कहा कि  भगवान श्रीकृष्ण के जन्म होने की सूचना जब कंस लगी, वह उन्हें बाल रूप में समाप्त करने का षडयंत्र सोचने लगा और उसने भगवान श्रीकृष्ण का मारने के लिए पूतना नाम का राक्षसी को भेजा. पूतना ने अपने वक्ष पर जहर लगा लिया था और उसे अपना दूध पिलाने के बहाने उसे अपने साथ ले गई. इधर कान्हा के घर में न होने पर माता यशोदा परेशान हो गईं. पूतना उठा कर श्रीकृष्ण को कुछ दूर लेकर गई उन्हें जैसे ही दूध पिलाने लगी। भगवान से उसके प्राण ही ले लिए. जिससे पूतना अपने असली रूप में आ गई और विशालकाय रूप के साथ रूदन करने लगी. भगवान के हाथों पुतना का वध होने से वह भी स्वर्गधाम को गई. वही गोबर्धन पूजा का वर्णन करते हुए कहा कि नंदगांव में पूजा की तैयारियां जोर शोर से चल रही थी. बालक कृष्ण ने मां यशोदा और नंदबाबा से पूजा के बारे में पूछा तो उन्होंने इंद्र की पूजा की बात बताई. इस पर भगवान कृष्ण ने कहा कि आप लोग सबकुछ देने वाले गोवर्धन की पूजा क्यों नहीं करते इंद्र तुम्हें क्या देते हैं. मां यशोदा के इंद्र के नाराज होने की बात कहने पर उन्होंने इंद्र के बजाए गोवर्धन पूजा की जिद पकड़ ली. अंत में सभी को कृष्ण की बात माननी पड़ी.स्वामी जी ने कहा कि भगवान की लीला कोई नहीं जानता। यह बात इंद्र को पता चली तो वह आग बबूला हो गया और ब्रजवासियों को सबक सिखाने के लिए तेज आंधी और बारिश शुुरू कर दी. इससे सभी लोग परेशान हो कृष्ण को कोसने लगे. बचाव की सारी व्यवस्थाएं फेल होने पर भगवान कृष्ण ने अपनी उंगली में गोवर्धन पर्वत को उठाकर सभी की रक्षा की. श्रीमद्भागवत अत्यंत गोपनीय रहस्यात्मक पुराण है. यह भगवत्स्वरूप का अनुभव कराने वाला और समस्त वेदों का सार है. संसार में फंसे हुए जो लोग इस घोर अज्ञानान्धकार से पार जाना चाहते हैं उनके लिए आध्यात्मिक तत्वों को प्रकाशित कराने वाला यह एक अद्वितीय दीपक है. इस मौके पर पूर्व प्रमुख भाजपा नेता संजय शर्मा मोनू कुमार अधिवक्ता  वशिष्ठ शर्मा हर्ष राज समेत कई भक्तों ने स्वामी जी से आशीर्वाद प्राप्त किया

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