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रमेश ‘कँवल’,बिहार प्रशासनिक सेवा के सेवा निवृत पदाधिकारी रविवरीय अंक के लिए संकलित

प्रवीन राय,ग़ाज़ीपुर की ग़ज़ल

तेरी यादों का हम हवन करते

साँस दर साँस का जतन करते
हम मरे जा रहे सुख़न करते

दिल तो जुड़ता है जुड़ते-जुड़ते पर
अव्वलन काम हैं नयन करते

हाथ जोड़े तो क्या मिला आख़िर
ख़ाक़ देखो मिला भजन करते

याद करने से लाख बेहतर था
तेरी यादों का हम हवन करते

अब तमाशा किये हैं रहबर वो
जो तमाशा थे राहजन करते

हाय वो ख़्वाब राजगद्दी के
उम्र गुज़री तो बन-गमन करते

~ प्रवीन राय

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