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——रमेश ‘कँवल’,बिहार प्रशासनिक सेवा के सेवा निवृत पदाधिकारी द्वारा रविवरीय अंक के लिए संकलित—–


प्रमोद रामावत ‘प्रमोद’ , नीमच की ग़ज़ल
इतनी तो ख़ुद्दारी हो
सिर पर भले तगारी हो
आँखों में चिन्गारी हो
सौदा तो नामुमकिन है
कैसी भी लाचारी हो
नज़रें नहीं झुकाएँगे
इतनी तो ख़ुद्दारी हो
ऐसे भी हैं लोग यहाँ
रोटी भी सरकारी हो
देश अगर अपना है तो
अपनी ज़िम्मेदारी हो।
प्रमोद रामावत ‘प्रमोद’ नीमच।
९४२४०९७१५५