खगड़िया,बिहार में दिनांक 19 नवंबर,2024 को आयोजित काव्य कुम्भ की मुखतसर दास्तान


अखिल भारतीय साहित्य सृजन मंच खगड़िया ने रामबली परवाना स्मृति पर्व की वेला में अपना तृतीय महाधिवेशन हरदास चक, खगड़िया में दिनांक 19 नवंबर, 2024 को हर्ष-उल्लास के साथ मनाया | यह आयोजन 3 सत्र में सम्पन्न हुआ जिसमें देश भर के विद्वान कवियों -साहित्यकारों ने अपनी सहभागिता दी | इस अवसर पर उद्घाटन सत्र में डॉ. विवेकानंद ने अन्य सम्मानित अतिथियों और मंच के पदाधिकारियों के साथ दीप प्रज्वलित कर साहित्यकार – समागम का उद्घाटन किया | साधना भगत ,अध्यक्ष ने सभी आगत अतिथियों का स्वागत किया | नन्द किशोर सिंह,स्वागत सचिव की देख रेख में स्थानीय छात्राओं ने चित्ताकर्षक स्वागत नृत्य से सभी का मन मोह लिया | कविता परवाना, महासचिव और संगीता चौरसिया, कोषाध्यक्ष ने अपना प्रतिवेदन पढ़ा |
द्वितीय सत्र में आगत कवियों – साहित्यकारों का विभिन्न सम्मानों यथा स्वर्ण सम्मान, रजत सम्मान, पाण्डुलिपि सम्मान से और तृतीय सत्र में बिहार गौरव सम्मान, खगड़िया गौरव सम्मान और संपादक श्री सम्मान से विभूषित किया गया |
डा० ब्रह्मदेव कुमार, गोड्डा (झारखंड) को उनकी कृति- डा० अमरेन्द्र के काव्य में समकालीन यथार्थ (शोध ग्रंथ) , डा० दिनेश चन्द्र प्रसाद दीनेश, न्यू टाउन, कोलकाता को उनकी कृति- काव्य सुधा (काव्य संग्रह) , बाबा बैद्यनाथ झा, पूर्णियां (बिहार) को उनकी कृति- मैं गीत गुनगुनाता (गीत संग्रह) , कालजयी घनश्याम, नई दिल्ली को उनकी कृति- उत्सव का दालान (ग़ज़ल संग्रह) , साधना भगत,खगड़िया (बिहार) को उनकी कृति- साधना के स्वर, (कविता संग्रह) , डा० सुधा सिन्हा सावी,पटना (बिहार) को उनकी कृति- ग़ज़लों की दुनिया में यादों की परियाँ (ग़ज़ल संग्रह) , दिलिप कुमार पाठक (मग उद्यम), जमशेदपुर, झारखंड को उनकी कृति- खूॅटा(उपन्यास) के लिए कोशी साहित्य शौर्य सम्मान 2024 (स्वर्ण सम्मान) से सम्मानित किया गया |

डा० सतीश चन्द्र भगत, दरभंगा (बिहार) को उनकी कृति- मिल गई सफलता
(बाल कहानी संग्रह) , राजेन्द्र राज, सूर्यगढा, लखीसराय (बिहार) को उनकी कृति- एक ऐसे समय में (कविता संकलन) ,रविशंकर साह, बलसारा, देवघर (झारखंड) को उनकी
कृति- धूल भरी चांदनी (कविता संग्रह) , नरेन्द्र कुमार सिंह त्यागी, सोनवर्षा, समस्तीपुर (बिहार) को उनकी कृति- ज़ख़्म किसको मैं दिखाऊँ (ग़ज़ल संग्रह) ,स्मिता शिप्रा
आदर्श नगर, गोड्डा (झारखंड) को उनकी कृति- अक्खज (अंगिका कविता संग्रह) ,डा० उषा किरण श्रीवास्तव,मुजफ्फरपुर (बिहार) को उनकी कृति-बज्जिका के सोलह संस्कार गीत (लोकगीत संग्रह) , सत्येंद्र कुमार पाठक,माधव नगर, जहानाबाद (बिहार) को उनकी
कृति- मगध क्षेत्र की विरासत,(वैभवपूर्ण ऐतिहासिक विरासत) , सौम्य कुमार विभु, दरभंगा (बिहार) को उनकी कृति- लक्ष्मण अर्द्धांगिनी उर्मिला (काव्य रचना) ,डॉ प्रतिभा स्मृति, दरभंगा (बिहार) को उनकी कृति- मैं और मेरी अल्हड़ कविता (काव्य संग्रह) और
मुकेश कुमार दूबे दुर्लभ,सीवान (बिहार) को उनकी कृति- मुरझाए पुष्प (कविता संग्रह) के लिए कोशी साहित्य गौरव सम्मान 2024 (रजत सम्मान) से अलंकृत किया गया |
सुषमा सिन्हा, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) , पंकज कुमार पाण्डेय,रोसड़ा (बिहार) , विकास कुमार विधाता, विष्णुपुर आहोक (बगूसराय) , रीतु प्रज्ञा, दरभंगा (बिहार) को उनकी कृति- भोर (बाल कविता संग्रह) , डा० अभिषेक कुमार,बलिया, बेगूसराय (बिहार) को उनकी कृति- लोकतंत्रस्य महा पर्व (काव्य संग्रह) ,सुमन कुमार,फुलवरिया, बेगूसराय (बिहार) को उनकी कृति- अब न अंगूठा छाप (लघुकथा संग्रह) , डॉ कमल किशोर चौधरी
पूर्णिया (बिहार) को उनकी कृति- मेरा इश्क़ सूफियाना (ग़ज़ल संग्रह) ,गिरीश चंद्र ओझा,
आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) को उनकी कृति- अंतर्मन के भाव (कविता संग्रह) के लिए कोशी मंच गौरव सम्मान 2024 (श्रेष्ठ सम्मान) से विभूषित किया गया |
डॉ मेहता नगेन्द्र सिंह,पटना (बिहार) , अवधेश्वर प्रसाद सिंह, रोसड़ा,बिहार, रमेश कँवल ,पटना, बिहार ,सुधीर कुमार प्रोग्रामर, सुलतानगंज, बिहार को बिहार साहित्य क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए बिहार गौरव सम्मान से अलंकृत किया गया |

डॉ भगवान प्र० उपाध्याय,प्रयागराज ( उत्तर प्रदेश) को उनकी संपादित कृति-
सोलह नई कहानियाँ (साझा कहानी संग्रह) और साहित्यांजलि प्रभा (हिन्दी पत्रिका)
के लिए और पारस कुंज को संपादक श्री सम्मान से विभूषित किया गया |
इस अवसर पर अनेक पुस्तकों का लोकार्पण किया गया जिसमें रमेश ‘कँवल’ की ‘इतराती बल खाती ग़ज़लें’ और ‘अमृतकाल की आधुनिक ग़ज़लें’ ,शिवकुमार सुमन की ‘सूरज दादा लगे भड़कने’ , ‘बेरहम दिल सो रहा है’ साधना भगत की ‘साधना के स्वर’, डॉ. कमल किशोर चौधरी की ‘मेरा इश्क सूफ़ीयाना’ और कविता परवाना की ‘कविता चली गाँव की ओर’ प्रमुख हैं |
काव्य कुम्भ में एक से एक कविताएं,गीत और ग़ज़लें पढ़ी गईं जिनमें कुछ कवियों के महत्वपूर्ण, बंद,अंश और शे’र दर्शकों को लुभाते रहे | आइए कुछ का रसास्वादन करें :-
वस्ल की रात उनके सितम
रब कही मेरा निकले न दम – कालजयी घनश्याम
नींद आती नहीं चैन भी लुप्त है,लग रही जिन्दगी आज बेकार है।
आपको देखकर मैं हुई बावरी,आप कह दें सजन क्या यही प्यार है- बाबा वैद्यनाथ झा
रिश्ते सारे बोझिल हो गए
दौलत देख के पागल हो गए – राजेन्द्र राज
आपसे बात नहीं होती है,
अब मुलाक़ात नहीं होती है – विकास कुमार विधाता
आपकी बातों में आ गए
क्या कहें आप मन भा गए — रमेश ‘कँवल’
छाई है चहु ओर उदासी
और खुशी पर भी है पहरा – पंकज कुमार पांडे
दरिंदों की तुलना हमसे मत कीजिए,
हम जानवरों को जानवर ही रहने दीजिए – दिनेश चन्द्र प्रसाद ‘दीनेश’
मौन करुणा के इशारे में लिखा सन्देश पढ़ दो
स्वप्न में आया हुआ जो वह नया परिवेश गढ़ दो – डॉ भगवान प्रसाद उपाध्याय
तेरी नजर से नजर मिलाना अपने बस की बात नही।
आज यहां से होश मे जाना अपने बस की बात नही – रवि शंकर साह
उसने जो लिखा खत मुझे इक दफा
जाने क्यों उसको सबसे छुपाती रही – डॉ. प्रतिभा स्मृति
किसी एक पर मैं नहीं कहता ‘पारस’
मैं हर एक रतन पे गजल कह रहा हूँ – पारस कुंज
मौसम और जलवायु को, समझो मेरे यार।
इसके बिना नहीं कट सकते, जीवन के दिन चार – प्रवीण कुमार प्रणव
हम नहीं झुकेंगे कि स्वाभिमान अभी बाकी है
हम नहीं थकेंगे कि पौरुष का अभिमान अभी बाकी है – डॉ अभिषेक कुमार
अश्क यूं न बहाते जाइये
सारे गम भुलाते जाइये – डॉ ब्रह्मदेव कुमार
थर- थर कांपै छै परान
देखी बेटी के सियान – डॉ स्मिता शिप्रा
अभी सफ़र में हूँ, तेरे ही शहर में हूँ,
मिलना चाहो तो बताऊं, खड़ा कौन से नुक्कड़ पर हूँ – डॉ अजय कुमार मीत
चील के पंख पर/करते हुए सफर/ मत काँव-काँव कर – दिलीप कुमार पाठक
समान बाज के ही मैं उड़ान रखता हूँ।
निग़ाह में सदा मैं आसमान रखता हूँ – नरेंद्र कुमार सिंह ‘त्यागी’
सुना है कि जीवन सुनहरी है शहरी,
भाईचारगी वहां पर नहीं है गहरी।। – सौम्य कुमार विभु
अपनों को तो गले लगाते हैं सभी,
तुम गैरों को भी गले लगाते रहो – मुकेश कुमार दुबे दुर्लभ
जल ही जग का जीवन है।
नारायण तुलसी वन है – गिरीश चंद्र ओझा इन्द्र
‘ धन्य-धन्य बिहार की धरती
सीतामढ़ी का पुनौरा धाम – डॉ उषाकिरण श्रीवास्तव
अद्भुत मेरी काशी है – सुषमा सिन्हा
काव्य कुम्भ की मस्ती में लोग देर शाम तक डूबे रहे | सभी ने इस आयोजन की भूरी-भूरी प्रशंसा की और अगले साल फिर मिलने की अभिलाषा लिए विदा हुए |
प्रस्तुति : रमेश ‘कँवल’,पटना