आधुनिक बिहार के नवनिर्माण में श्रीबाबू के योगदान अविस्मरणीय


कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सिंह व पूर्व अध्यक्ष रामजतन सिन्हा सहित कई बड़े नेताओं ने किया स्मरण*
जहानाबाद
बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री व बिहार केशरी के नाम से विख्यात डा.श्रीकृष्ण सिंह की जयंती पर उन्हें यहां कांग्रेस कर्मियों ने अब्दुलवारी नगर भवन में एक शानदार समारोह का आयोजन कर उन्हें श्रद्धा के साथ स्मरण करते हुए उनके विराट व्यक्तित्व व कृतित्व की विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम को व्यापक रूप से सफल बनाने को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष प्रो.रामजतन सिन्हा के पुत्र व पार्टी के युवा नेता अमित सिन्हा ने पिछले कई दिनों से यहां डेरा जमा रखा था। उन्होने समारोह में आए अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि श्रीबाबू के आदर्श पर चलकर ही युवा नेता मुकाम हासिल कर सकते हैं। श्रीकृष्ण महिला कॉलेज के प्राचार्य अरमान बानो की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का संचालन पूर्व मुखिया जितेन्द्र शर्मा ने किया। समारोह में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डा.अखिलेश प्रसाद सिंह के अलावा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रो.रामजतन सिन्हा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदनमोहन झा, पूर्व मंत्री कृपानाथ पाठक, विक्रम के पूर्व विधायक अनिल कुमार, जहानाबाद जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोपाल शर्मा, योगेन्द्र कुमार उर्फ योगाजी, पूर्व मुखिया रूद्रेश शर्मा, प्रवीण शर्मा, अक्षय शुक्ला, लखीसराय जिलाध्यक्ष अमरेश कुमार अनिस, गया जिलाध्यक्ष गगन मिश्रा, रीता सिंह, नवादा जिलाध्यक्ष मंटन सिंह सहित कई अन्य पार्टी नेता उपस्थित थे। समारोह को संबोधित करते हुए बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डा.अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि श्रीबाबू एक असाधारण प्रतिभा के महान राजनेता थे। संयुक्त बिहार के विकास में उनका योगदान अतुलनीय है। उन्होने कहा कि श्री बाबू का आधुनिक बिहार के नवनिर्माण में योगदान अविस्मरणीय है। नई पीढ़ी को उनके महान व्यक्तित्व से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने की जरूरत है। उन्हाेने श्रीबाबू के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे न सिर्फ बिहार बल्कि देश के महान राजनेताओं में विशिष्ट थे। वे केवल व्यक्ति नहीं, एक विचारधारा थे। उन्होने देश आजादी के उपरांत आधुनिक बिहार के निर्मान में अपनी अहम भूमिका निभाई।
इधर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रो.रामजतन सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि आज जहां जाति-धर्म का विभेद गहराया हुआ है, वहीं अपने जमाने में अछूतों को सबसे पहले देवघर जैसे मंदिर में प्रवेश सुनिश्चित कराया और जीवन भर उन्होने समाज व व्यापक देशहित में सामाजिक समानता को बल देते रहे। इसिलिए वे सभी वर्गो के लिए आज भी आदरणीय हैं। उनका व्यक्तित्व सबकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
उन्होने कहा कि उन्होने जिस विपरित हालात में संयुक्त बिहार में कल कारखानो का जाल स्थापित किया, यह उनकी असाधारण प्रशासकीय क्षमता का प्रमाण है। एक ओर जहां बरौनी रिफाइनरी, भारत हेवी एन्जिनियरिंग रांची, बोकारो स्टील प्लांट, रासायनिक खाद कारखाना सिन्दरी आदि कई ऐसे उद्योगों की स्थापना कराई जिससे सूबे के विकास को बल मिला और तब हजारों हाथों को रोजगार भी उपलब्ध हुआ था। मदन मोहन झा ने कहा कि आजादी के बाद आन्तरिक संसाधन की कंगाली के बावजूद उन्होने अपनी कार्य कुशलता व कठिन परिश्रम के माध्यम से बिहार को सबसे सुशासित प्रदेश बनाया। उनकी सादगी व विद्वता पूरे देश के राजनीतिज्ञों के लिए प्रेरणा है। उनके पदचिन्ह पर चलकर ही समाज, राज्य व राष्ट्र को विकसित बनाया जा सकता है।