रोड नहीं तो वोट नहीं, ऐलान के बाद प्रशासन में आई जागरूकता

जहानाबाद
बीते दो दशक से अधिक समय से जर्जर सड़क से जूझ रहे मोहल्लेवासीयों ने चुनाव बहिष्कार का किया था एक पखबाड़े पहले ऐलान कुम्भकरनी नींद में सोया विभाग जगा, मलहचक मोड़ से घोड़ा अस्पताल जाने वाली सड़क का दो दशक बाद होने लगा मरम्मती कार्य, जिले मुख्यालय के नगर क्षेत्र के फ़िदाहुसैन रोड से मलहचक मोड़ होते हुए घोड़ा अस्पताल तक जाने वाली रोड के आसपास बसे मुहल्ले वासी सड़क में कई स्थानों पर बीते एक पखबाड़े पूर्व बैनर लगा कर वोट बहिष्कार की घोषणा किया था।जिसके बाद जिला प्रशासन व सड़क निर्माण विभाग का निंद्रा भंग हुआ और सड़क के मरम्मती का कार्य शुरू किया गया है। हालांकी यह बैनर किसने लगाया है ।कोई सामने आकर बोलने को तैयार नहीं हुआ था, लेकिन जर्जर सड़क के पुर्ननिर्माण की यह तरकीब काम कर गई।ज्ञात हो कि इस सड़क मार्ग से फ़िदा हुसैन, मलहचक, कुटियापर, लोक नगर, श्याम नगर सहित कई अन्य मुहल्ले के लोगों के साथ शहर से बाहर के लोगों का आना जाना अधिक रहता है। क्योंकि मलहचक मोड़ के समीप ज्यादातर कोचिंग संस्थान संचालित होते हैं वहीं डीएवी, प्रतिभा पल्लवन, रामकृष्ण परमहंस, शिक्षा विभाग, पशुपालन विभाग तथा कई अन्य कार्यालय तथा एस एस कॉलेज जाने वाली यही मुख्य सड़क मार्ग है। वहीं बाल सुधार गृह, एस सी /एस टी छात्रावास, पिछड़ा वर्ग छात्रावास एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग छात्रावास के छात्रों के साथ हीं शिक्षा विभाग तथा पशुपालन विभाग सहित कई अन्य विभाग के कार्यालय भी इसी सड़क मार्ग में हैं। बड़ी आबादी के रोजमर्रा का सम्बन्ध इस सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। इस सड़क का पुर्ननिर्माण बीते कई दशक से नहीं होने की वजह से हाल के दिनों में आमलोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।जिससे आक्रोशित होकर मुहल्ले वासियों नें “रोड नहीं तो वोट नहीं” का बैनर लगाते हुए जिला प्रशासन व चुनाव आयोग को चेतावनी दी थी कि अगर जल्द सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे आगामी चुनावों का बहिष्कार करेंगे।लोगों नें आरोप लगाया था कि वर्षों से प्रशासनिक अधिकारीयों व जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। बरसात के मौसम में कीचड़ और जलजमाव से स्थिति और भी दयनीय हो जाती है। एम्बुलेंस, स्कूल वाहन, यहां तक कि साइकिल क्या पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।पक्की सड़क के निर्माण की मांग बीते कई सालों से चली आ रही है। लेकिन न तो प्रशासन की तरफ से समस्या का निपटारा हुआ और न ही जनप्रतिनिधियों ने कोई सुध ली। जिसके बाद मोहल्लेवासी ने ही आगामी चुनाव के बहिष्कार का ऐलान कर दिया था।
