जहानाबाद आज़ादी के मतवालों की धरतीसैय्यद आसिफ इमाम काकवी


जहानाबाद आज़ादी के मतवालों की धरती
सैय्यद आसिफ इमाम काकवी
जहाँ मिट्टी भी शहादत की गवाही देती है जब भी हम भारत के स्वतंत्रता संग्राम की बात करते हैं, तो दिल्ली, कोलकाता और मुंबई जैसे बड़े शहरों के नाम ज़हन में आते हैं। लेकिन बिहार का जहानाबाद—यह छोटी-सी ज़मीन का टुकड़ा—इतिहास में अपनी वीरता और बलिदान के लिए अमिट अक्षरों में दर्ज है। यहाँ की मिट्टी ने ऐसे-ऐसे सपूत पैदा किए जिन्होंने अपने ख़ून से आज़ादी का परचम रंग दिया।
फिदा हुसैन — ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ बुलंद आवाज़
मगध गांधी के नाम से मशहूर फिदा हुसैन ने असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। अंग्रेजी नीतियों का खुलेआम विरोध किया और कई बार जेल गए, लेकिन उनके हौसले कभी पस्त नहीं हुए। वे जहानाबाद के पहले विधायक भी रहे।
बद्रीनारायण सिंह — क्रांति के रणबांकुरे
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में बद्रीनारायण सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ सीधा मोर्चा खोला। रेलवे स्टेशन, पुलिस चौकी और सरकारी दफ़्तर—कहीं भी विद्रोह की चिंगारी बुझने नहीं दी।
मदन मोहन प्रसाद सिंह — संघर्ष का दूसरा नाम
कसमा गाँव के इस सपूत ने युवाओं में क्रांति की अलख जगाई। उनके लिए आज़ादी का मतलब सिर्फ़ अंग्रेजों को भगाना नहीं, बल्कि भारतीय समाज को आत्मनिर्भर बनाना भी था।
साधु शरण सिंह — स्कूल से सीधा मैदान-ए-जंग में
व्हिट्टी स्कूल के विद्यार्थी साधु शरण सिंह ने 1942 में किताब छोड़ हथियार उठा लिए। बिना डरे अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में कूद पड़े।
अन्य वीर सपूत
जहानाबाद की मिट्टी ने अब्दुल बारी, लतीफ़ शम्सी, सैयद ज़की अशरफ, रामप्यारे सिंह जैसे कई योद्धाओं को जन्म दिया। इनके साथ बृजनंदन सिंह, रामाश्रय नाथ सिन्हा, नागेश्वर मिश्र, कपिलदेव शर्मा और अनगिनत गुमनाम नायक भी थे, जिनके बलिदान से यह धरती पावन बनी।
1857 की पहली गूंज
1857 के विद्रोह में भी जहानाबाद के सपूतों ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी। काको, शकुराबाद, घोसी, मखदुमपुर जैसे इलाक़ों से विद्रोही उठ खड़े हुए और पुलिस थानों व सरकारी दफ़्तरों पर हमले किए।
आज जब हम आज़ाद हवा में सांस लेते हैं, तो यह याद रखना होगा कि इस आज़ादी की कीमत जहानाबाद के बेटों-बेटियों ने अपने ख़ून से चुकाई है। जहानाबाद का इतिहास सिर्फ एक ज़िले की दास्तान नहीं—यह भारत माता की उन अनगिनत कहानियों में से एक है, जिनकी वजह से हम आज गर्व से कह सकते हैं मैं आज़ाद हिंदुस्तान का नागरिक हूँ।” 🇮🇳