मगही के संघर्ष को मिला संबल: मंत्री और जिलाधिकारी प्रतिनिधि के हस्तक्षेप से समाप्त हुआ ऋचा झा का ऐतिहासिक अनशन








गयाजी
गांधी मैदान गयाजी में समाजवादी लोक परिषद के बैनर तले चल रहा ऐतिहासिक मगही आमरण अनशन आज तीसरे दिन बिहार के सहकारिता मंत्री एवं गया नगर विधायक डॉ. प्रेम कुमार के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ। अनशन तोड़ने का कार्य उन्होंने स्वयं अपने हाथों से किया और मगही भाषा को संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल कराने के लिए ठोस पहल का भरोसा दिलाया।डॉ. प्रेम कुमार ने कहा —”समाजवादी लोक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष हेमांशु शेखर जी एवं मगही के 19 संगठनों द्वारा सौंपा गया ज्ञापन मैं मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी को दूंगा और इसे केंद्र सरकार तक मजबूती से पहुंचाकर अष्टम अनुसूची में मगही को शामिल कराने का हरसंभव प्रयास करूंगा।”अनशन स्थल पर डॉ. उमाशंकर सिंह सुमन ने अपनी सशक्त मगही कविता “शंखनाद हम आज करम, पटना- दिल्ली के नींद तोड़ मगहिया…” से आंदोलन को नई ऊर्जा दी।
डॉ. टी. एच. खान ने भी मंच से वादा किया कि “जब भी मेरी जरूरत होगी, मैं मगही के लिए तैयार रहूंगा।”ऋचा झा (राष्ट्रीय प्रधान महासचिव, समाजवादी लोक परिषद) ने मंत्री से सीधी अपील करते हुए कहा —
“मगही के हक की लड़ाई में अब कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी, हमें ठोस परिणाम चाहिए।”डॉ. सचितानंद प्रेमी ने भी मंत्री जी से मगही को लेकर निर्णायक रुख अपनाने का आग्रह किया।
इस आंदोलन के सूत्रधार एवं आयोजक हेमांशु शेखर ने स्पष्ट कहा —”जब तक अष्टम अनुसूची में मगही शामिल करने का ठोस भरोसा नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।”तीसरे दिन अनशन स्थल पर कई जिलों से लोग जुटे। डॉ. दिलीप कुमार की उपस्थिति ने आंदोलन की गंभीरता को और मजबूती दी।
सुमंत कुमार ने अपने प्रभावशाली वक्तव्य से उपस्थित जनसमूह में जोश भर दिया।
जिलाधिकारी प्रतिनिधि मुकेश कुमार ने कहा —”ऋचा झा जी का तीन दिन का आमरण अनशन सिर्फ मगही की आवाज़ नहीं, बल्कि मगध की आत्मा की पुकार था। प्रशासन की ओर से मैं आश्वस्त करता हूँ कि यह मांग सरकार तक पूरी गंभीरता से पहुंचाई जाएगी और अष्टम अनुसूची में मगही को स्थान दिलाने की प्रक्रिया में हर कदम पर साथ रहूंगा।”राष्ट्रीय प्रवक्ता पंकज मिश्रा ने कहा —”मगही के लिए संघर्ष सिर्फ आंदोलन नहीं, यह मेरी आत्मा की पुकार है। जब तक अष्टम अनुसूची में स्थान नहीं मिलता, यह लड़ाई जारी रहेगी।”
प्रमुख कार्यकर्ताओं, नेताओं एवं साहित्यकारों के वक्तव्य में मुन्ना कुमार (राष्ट्रीय सलाहकार )— “मगही को अष्टम अनुसूची में लाना हमारी पीढ़ी का ऐतिहासिक दायित्व है, इसे हम पूरा करके ही दम लेंगे।”मुकेश मिश्रा (राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष )— “यह आंदोलन हमारी अस्मिता का प्रहरी है, और इसे कमजोर करने की कोई भी कोशिश नाकाम होगी।”मनोज मिश्रा — “मगही सिर्फ भाषा नहीं, हमारी आत्मा की धड़कन है, इसे संविधान में स्थान दिलाना हमारा कर्तव्य है।”डॉ. रामकृष्ण मिश्रा — “अष्टम अनुसूची में मगही का स्थान मिलना हमारी आने वाली पीढ़ियों की सांस्कृतिक सुरक्षा का गारंटर होगा।”अरविन्द कुमार आजान्स — “यह संघर्ष मगध की पहचान का प्रतीक है, हम इसे अधूरा नहीं छोड़ेंगे।”रजनीकांत कुशवाहा — “मगही का सम्मान हर मगधवासी का स्वाभिमान है, और हम इसके लिए अंत तक लड़ेंगे।”विकास सिन्हा (उपाध्यक्ष) — “सरकार को समझना होगा कि मगही को नजरअंदाज करना मगध की आत्मा को चोट पहुँचाना है।”पूनम कुमारी एवं रानी मिश्रा — “मगही की लड़ाई में महिलाएं भी कंधे से कंधा मिलाकर आगे रहेंगी।”अविनाश कुमार सोनू — “जब तक मगही को अष्टम अनुसूची में स्थान नहीं मिलता, हमारी कलम और आवाज़ रुकेगी नहीं।”गौतम परासर — “मगही का संघर्ष इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा, हम इस लड़ाई को जीतकर ही मानेंगे।”महेंद्र देहाती — “मगही हमारी आत्मा की आवाज़ है, इसे अष्टम अनुसूची में लाना ही हमारी सबसे बड़ी जीत होगी।”मौजूद प्रमुख हस्तियां — महेन्द्र देहाती, डॉ. रामकृष्ण मिश्रा, डॉ. बृजनन्दन पाठक, जहानाबाद से डॉ. उमाशंकर सिंह, संतोष श्रीवास्तव तथा विश्वजीत अलबैला , डॉ. राम परीखा सिंह, डॉ. मुरली मनोहर पाण्डेय, जयनन्दन सिह कृष्ण कुमार भट्ट, दीपक कुमार, धर्मेंद्र कुमार, देवानंद पासवान रानी मिश्रा, सतेन्द्र कुमार गौतम, आचार्य गोपाल, प्रियांशु, लोकेश, कुमारी नीरज, सोनू कुमार, दिनेश गांधी, बैजू सिंह, विवेक, प्रवीण बाटोहिया, लखेरा जी, राजा, आदि।मगध और आसपास के जिलों से पहुंचे जनसमूह ने एक स्वर में ‘जय मगही’ के नारे लगाए और संकल्प लिया कि यह आंदोलन अष्टम अनुसूची में मगही के शामिल होने तक जारी रहेगा।
जनसमर्थन इतना व्यापक था कि अनशन तोड़ने का निर्णय भी लोगों की सहमति और जोश के बीच लिया गया।
यह अनशन सिर्फ एक भाषा का संघर्ष नहीं, बल्कि मगध की सांस्कृतिक धरोहर और अस्मिता की रक्षा का अभियान है।