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कोई चाहे या ना चाहे

कोई चाहे या ना चाहे
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कोई चाहे या ना चाहे
ख़ुद से ही मुझे प्यार है
मेरा जज़्बा मेरा जुनून
यक़ीनन यही मेरा यार है
कोई चाहे या ना चाहे
ख़ुद से ही मुझे प्यार है
हम अपने मर्ज़ी के मालिक
न किसी के ग़ुलाम है
मेरा सपना मेरा लक्ष्य
यही मेरा मुकाम है
वो दिन आएगा ज़रूर
जिसका इंतज़ार है
मेरा जज़्बा मेरा जुनून
यक़ीनन यही मेरा यार है
कोई चाहे या ना चाहे
ख़ुद से ही मुझे प्यार है
इस जीवन की आपाधापी ने
यारों! रंग बहुत दिखाए है
टूट के जुड़े हैं कई बार
सुन दिल में दर्द छुपाए हैं
खुशियां आएगी क़दमों में
मुझको ऐतबार है
मेरा जज़्बा मेरा जुनून
यक़ीनन यही मेरा यार है
कोई चाहे या ना चाहे
ख़ुद से ही मुझे प्यार है
रचना परिंदा जहानाबादी उर्फ बलिराम प्रसाद स्वर्णकार