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रचना -गीतकार परिंदा जहानाबादी

बूंद की क्या विसात
दरिया यूंही बहेगी
अफ़सोस हम न होंगे
दुनियां यही रहेगी
बूंद की क्या विसात
दरिया यूंही बहेगी
हमसे पहले आएं कई
जाने कहां चले गएं
करूं क्यों खुद पे नाज़
ये दीवारें भी ढहेगी
बूंद की क्या विसात
दरिया यूंही बहेगी
हम सब हैं मेहमान
आए हैं सैर करने
आ जाएगा समझ में
आंखों से जब पट्टी हटेगी
बूंद की क्या विसात
दरिया यूंही बहेगी
कुछ ऐसा कर जाएं
यहां छाप छोड़ जाएं
कहानियां हमारी , ये
हंसी वादियां कहेगी
बूंद की क्या विसात
दरिया यूंही बहेगी
अफसोस हम न होंगे
दुनिया यही रहेगी
रचना -गीतकार परिंदा जहानाबादी
