विधान सभा चुनाव के कुछ माह पहले , वोटर लिस्ट का सुधार को आम जनता समझ रहा है –आभा रानी

जहानाबाद
जहानाबाद जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष वर्तमान में जिला पार्षद राजद नेत्री आभा रानी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि बिहार में विधानसभा चुनाव से ऐन पहले निर्वाचन आयोग द्वारा वोटर लिस्ट को जबरन नए सिरे से तैयार कराने का आदेश एक साजिश है। यह गरीबों, दलितों, पिछड़ों, मज़दूरों और अल्पसंख्यकों के मताधिकार पर सीधा हमला और उनके वोट की चोरी करने की सुनियोजित कोशिश है। 20 साल से सत्ता में बैठे लोग जानते हैं कि अब बिहार की जनता उनके झूठे वादों में फँसने वाली नहीं। इसलिए अब नए खेल के तहत वोटर लिस्ट में गरीबों के नाम काटने की तैयारी कर रहे हैं।
क्यों बिहार में ही ऐसा आदेश? क्यों चुनाव से ठीक पहले ऐसा आदेश? मानसून में जब गरीब दिहाड़ी में उलझा है, खेत पानी में डूबे हैं, बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, तब दस्तावेज़ों की जांच के नाम पर दरवाज़े-दरवाज़े जाकर गरीबों को डराने का काम क्यों? क्या यह “स्पेशल इंटेन्सिव रिविज़न” नहीं बल्कि “स्पेशल इंटेन्सिव वोट चोरी मिशन” है?
बीजेपी और उनके साथी जान लें, बिहार के वोट को गिनती में काटकर चोरी करने की कोशिश करोगे तो बिहार की जनता तुम्हें सत्ता से उखाड़ फेंकेगी। तेजस्वी यादव जी ने पहले ही कहा था कि ये सरकार हमारी नीतियों की नकल कर रही है, लेकिन अब ये हमारी जनता की आवाज़ भी छीनना चाह रहे हैं।
जब 2024 का लोकसभा चुनाव इसी वोटर लिस्ट से हुआ, तो क्या वह लिस्ट गलत थी? अगर गलत थी, तो सरकार ने गलत लिस्ट क्यों बनाई? किसकी ज़िम्मेदारी है, कौन दोषी है? जवाब दो। ये जो खेल रचा जा रहा है, इसका एक ही मकसद है कि गरीबों, दलितों और पिछड़ों का नाम काटकर सत्ता में घुसपैठ की जाए। ये देश संविधान से चलता है, आरएसएस और बीजेपी की गोदी नीति से नहीं।
हम चुनाव आयोग से स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं कि गरीबों का वोट छीनने की हिम्मत मत करना। राजद इस साज़िश के खिलाफ सड़कों पर उतरेगा, गांव-गांव में लोगों को जागरूक करेगा और लोकतंत्र की इस डकैती को हर हाल में रोक कर रहेगा।
बिहार ने हमेशा लालू प्रसाद यादव जी और तेजस्वी यादव जी के नेतृत्व में सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ी है और मताधिकार पर डाका डालने की हर साज़िश को नाकाम किया है। आज भी इस लोकतांत्रिक लड़ाई में हम बिहार की जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। वोट करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और हम इसे किसी को छीनने नहीं देंगे।
