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डॉ एकता की कलम से—-


हमें जिंदगी से बहुत सवाल थे,जिंदगी ने सवाल बदल डाले।
वक्त ने सारे हालात बदल डाले, हालत ने सारे जज्बात बदल डाले।
*सबके दिलों में धड़कने का हुनर तो नहीं*
*लेकिन सबकी आंखों में खटकते जरूर है ।*
*अक्सर लोग हमें ही गुनहगार बना देते हैं।**
*धूल से भरा उनका चेहरा और आईना हमें दिखा रहे हैं।*
*एक दिन सबको उड़ जाना है ,तस्वीर से रंगों की तरह।*
*वक्त की टहनी पर बैठे हैं हम, उड़ जाएंगे एक दिन परिंदों की तरह?*