मासिक धर्म आने के बाद एहतियात बरतना आवश्यक :- डॉ प्रमोद



रिपोर्ट,संजय सोनार
कुर्था (अरवल) मासिक धर्म आने पर वरते एहतियात खासकर किशोरियों को मासिक धर्म आने पर स्पष्ट तौर से अपने परिवारों को बताना चाहिए ताकि उसका समुचित उपाय उनके परिवार कर सकें। उक्त बातें शनिवार को कुर्था हाई स्कूल में राष्ट्रीय मासिक दिवस पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के समापन के दौरान कुर्था सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ0 प्रमोद कुमार ने विद्यालय में पढ़ रहे छात्रों को संबोधित करते हुए कहीं उन्होंने कहा कि मासिक धर्म आपके गर्भाशय की परत का मासिक रूप से बहना मासिक धर्म को मासिक धर्म अवधि, मासिक धर्म चक्र या अवधि के नाम से भी जाना जाता है। मासिक धर्म का रक्त जो आंशिक रूप से रक्त और आंशिक रूप से आपके गर्भाशय के अंदर से ऊतक होता है आपके गर्भाशय से आपके गर्भाशय ग्रीवा के माध्यम से और आपकी योनि के माध्यम से आपके शरीर से बाहर निकलता है
मासिक धर्म हार्मोन द्वारा संचालित होता है। हार्मोन आपके शरीर में रासायनिक संदेशवाहक होते हैं। आपकी पिट्यूटरी ग्रंथि (आपके मस्तिष्क में) और आपके अंडाशय (आपके प्रजनन तंत्र का हिस्सा ) आपके मासिक धर्म चक्र के दौरान निश्चित समय पर कुछ हार्मोन बनाते और छोड़ते हैं। ये हॉरमोन आपके गर्भाशय की परत को मोटा कर देते हैं। ऐसा इसलिए होता है ताकि अगर गर्भावस्था हो, तो एक अंडा आपके गर्भाशय की परत में प्रत्यारोपित हो सके। हॉरमोन आपके अंडाशय से एक अंडा (ओव्यूलेशन) भी निकालते हैं। अंडा आपकी फैलोपियन ट्यूब से नीचे चला जाता है , जहाँ यह शुक्राणु का इंतज़ार करता है। अगर कोई शुक्राणु उस अंडे को निषेचित नहीं करता है, तो गर्भावस्था नहीं होती है। आपके गर्भाशय की परत टूट जाती है और गिर जाती है। यह आपका मासिक धर्म है।मासिक धर्म चक्र एक ऐसा शब्द है जो आपके शरीर में होने वाली घटनाओं के अनुक्रम का वर्णन करता है। इस मौके पर स्वास्थ्य प्रबंधक शशांक शेखर समेत कई स्वास्थ्य कर्मी शामिल थे।