शिव गुरु की दया ही वास्तविक दीक्षा है: शिवपूजन सिंह.



अरवल, सदर प्रखंड अंतर्गत भदासी सूर्य मंदिर के प्रांगण में सोमवार को एकदिवसीय शिव गुरु चर्चा का आयोजन किया गया जिसका मुख्य उद्देश्य शिव जन-जन के गुरु हो इस विषय पर विस्तार पूर्वक चर्चा की गई. इस अवसर पर उपस्थित शिव शिष्य परिवार को संबोधित करते हुए औरंगाबाद से आए शिव पूजन सिंह ने कहा कि शिव गुरु की दया ही वास्तविक दीक्षा है. उन्होंने इस पर विस्तार पूर्वक चर्चा करते हुए कहा कि गुरु अपने शिष्य के उत्तरदायित्व का जिम्मेदारी लेते हैं. कब जब शिष्य उनके बताए रास्ते पर चलता है तब. उन्होंने कहा कि कहा कि इस कालखंड में सर्वप्रथम साहब श्री हरीद्रानंद जी ने शिव को अपना गुरु बनकर जगत में अपनी अनुभूति के अनुसार लोगों को शिव का शिष्य होने के लिए प्रेरित किया. इसके लिए साहब श्री के द्वारा तीन सूत्र बताए गए हैं. जिसमें दया, चर्चा और नमः शिवाय शामिल है. उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति एक निस्ट होकर मन से प्रत्येक दिन तीनों सूत्र का पालन करता है उसके जीवन में गुरु की दया स्वतः उतरने लगते हैं. उन्होंने कहा कि शिव को जगतगुरु कहा जाता है. इसलिए शिव के शिष्य होने के लिए किसी प्रकार की वर्जित वर्जन का कहीं कोई प्रतिबंध नहीं है. उन्होंने कहा कि शिव मांस खाने वाले और फल खाने वाले के भी गुरु हो सकते हैं. क्योंकि जगत में आया हुआ प्रत्येक मानव को यह पूरा अधिकार है कि वह शिव को अपना गुरु मानकर उन्हें अपना शिष्य भाव अर्पित कर करें. आज जगत में करोड़ों लोग शिव का दया प्रकार अपना जीवन सुखमय शिवमय बना रहे हैं. इस अवसर पर मंच का संचालन शिव कार्य समिति के अध्यक्ष विंदेश्वरी प्रसाद उर्फ सेठ भाई ने किया. जबकि मुख्य आयोजक शैलेश प्रसाद के नेतृत्व में कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया. इस अवसर पर शारदा भाई, वीरेंद्र भाई, अर्जुन भाई, अमरजीत भाई, दिलीप भाई, सुभाष भाई, अखिलेश भाई,इंदु देवी, नीलम देवी, जानकी, देवी मनोरमा देवी सहित सैकड़ो लोगों ने शिव को अपना गुरु बनने पर जोर दिया. (फोटो)
