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पृथ्वी दिवस पर मेरी एक रचना

पृथ्वी दिवस पर मेरी एक रचना

“पृथ्वी / धरती “

मैं जाऊं चाहे कहीं भी
मेरा जिस्म जान मन
चाहे तेरा ही स्पर्श
हे धरती मां
तुझे मेरा नमन।

लगा माथे से
तेरा चरण रज
हो जाऊं मैं तो धन्य
हे धरती मां
तुझे मेरा नमन।

मैं उड़ूं चाहे दूर नील गगन
मुझे मिले चैन सूकून
तेरे ही आंगन
हे धरती मां
तुझे मेरा नमन।

मुझे है हर दौलत से प्यारी
हर शोहरत से प्यारी
तेरे आंगन की हरियाली
हे धरती मां
तुझे मेरा नमन ।

हसरत हैं, मेरी यही
मेरे रक्त हर बूंद
सींचे तेरा कण कण
हे धरती मां
तुझे मेरा नमन
तुझे मेंरा नमन….।

संगीता सागर
मुजफ्फरपुर,
बिहार।

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