✨ काव्यात्मक हैडिंग:“ख़्वाजा के आस्ताने पर झुकी बिहार की रूह — अमन, मोहब्बत और इंसानियत की दुआ”


बिहारशरीफ (नालंदा)
अजमेर शरीफ की मुक़द्दस सरज़मीं पर आज फिर अकीदत, मोहब्बत और भाईचारे की रूहानी ख़ुशबू बिखर गई। ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगान, हज़रत ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह के 814वें उर्स-ए-मुबारक के मौके पर बिहार की धरती ने भी पूरे ख़ुलूस के साथ अपनी सच्ची अकीदत पेश की।
माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी की ओर से भेजी गई चादर को लेकर जनाब ज़ामा ख़ान, माननीय मंत्री, बिहार सरकार, ख़्वाजा गरीब नवाज़ के पाक दरबार में हाज़िर हुए और पूरे अदब-ओ-एहतराम के साथ चादरपोशी अदा की। यह सिर्फ़ एक औपचारिक रस्म नहीं थी, बल्कि बिहार की जनता की ओर से अमन, दुआ और इंसानियत का सजीव पैग़ाम था।
जब चादर ख़्वाजा के मुक़द्दस आस्ताने पर पेश की गई, तो हर दिल से यही तमन्ना उठी कि ख़्वाजा गरीब नवाज़ की रहमत से मुल्क में अमन-ओ-चैन क़ायम रहे, नफ़रतों की दीवारें ढहें और मोहब्बत की रौशनी हर घर तक पहुँचे। इस मौक़े पर माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी की अच्छी सेहत, लंबी उम्र और मज़बूत इरादों के लिए ख़ास दुआ की गई। साथ ही देश और प्रदेश—ख़ासकर बिहार—में अमन, चैन, खुशहाली, तरक्क़ी और आपसी सौहार्द के लिए दिल से दुआएँ माँगी गईं।
यह दुआ उन करोड़ों आवाज़ों की गूँज थी जो चाहती हैं कि भारत की मिट्टी हमेशा गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल बनी रहे। अजमेर शरीफ का उर्स सदियों से इंसानियत का पैग़ाम देता आया है—यहाँ मज़हब, जाति और ज़बान की सारी दीवारें अपने-आप गिर जाती हैं। यही वह दरबार है जहाँ बादशाह और फ़क़ीर एक ही सफ़ में खड़े होकर सिर झुकाते हैं।
बिहार सरकार की ओर से पेश की गई यह चादर उसी साझी विरासत और साझा तहज़ीब की तस्दीक़ थी कि हम सब एक हैं और हमारा मक़सद भी एक—अमन और इंसानियत। जनाब ज़ामा ख़ान की मौजूदगी ने इस अवसर को और भी मआनीख़ेज़ बना दिया। उन्होंने बिहार की जनता की भावनाओं को अपने साथ लेकर ख़्वाजा के दरबार में हाज़िरी दी और यह यक़ीन दिलाया कि बिहार हमेशा सूफ़ियाना परंपरा, भाईचारे और मोहब्बत के रास्ते पर क़ायम रहेगा।
यह हाज़िरी सत्ता का प्रदर्शन नहीं, बल्कि सेवा, विनम्रता और दुआ का इज़हार थी। ख़्वाजा गरीब नवाज़ का पैग़ाम आज भी उतना ही ज़िंदा है—
“मोहब्बत सबके लिए, नफ़रत किसी से नहीं।”
इसी पैग़ाम को दिलों में बसाकर आज की चादरपोशी अदा की गई, ताकि समाज में भरोसा बढ़े, दिलों में सुकून उतरे और आने वाली नस्लें अमन की फ़िज़ा में साँस लें।
दुआ है कि ख़्वाजा-ए-अजमेर की रहमत से बिहार तरक्क़ी की नई बुलंदियों को छुए, देश मज़बूत हो और हर इंसान के चेहरे पर मुस्कान क़ायम रहे। आज ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगान के मुक़द्दस आस्ताने से सिर्फ़ दुआ नहीं उठी, बल्कि पूरे हिंदुस्तान के लिए मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत का पैग़ाम बुलंद हुआ।
बिहार की जनता की ओर से माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी की तरफ़ से पेश की गई यह चादर इस बात की गवाही है कि हमारी सियासत की जड़ें नफ़रत में नहीं, बल्कि सूफ़ियाना मोहब्बत में हैं। ख़्वाजा गरीब नवाज़ के दरबार में झुका हर सिर इस सच्चाई का इकरार था कि
अमन ही सबसे बड़ी इबादत है।
आज की चादरपोशी उस उम्मीद का नाम है कि देश में नफ़रत की जगह भरोसा ले, मायूसी की जगह रौशनी आए और हर दिल सुकून पाए। यहाँ माँगी गई दुआ किसी एक सूबे तक सीमित नहीं थी—यह हर उस इंसान के लिए थी जो बेहतर कल का ख़्वाब देखता है।
ख़्वाजा गरीब नवाज़ की बारगाह में उठे हाथ यही कहते हैं—
“या ख़्वाजा! हमारे वतन को सलामत रख, दिलों को जोड़ दे और इंसानियत को कामयाब कर दे।”
