अपरचित अक्षरों का ज्ञान देने वाले धैर्यवान होते हैं गुरु,लेकिन अनुभव पुरुस्कृत है

अरवल
अरवल-वैसे तो बच्चे के लिए प्रथम गुरु उसकी माँ होती है,जीवन के शुरूआती दौर में,हर माँ अपने बच्चे के साथ अधिक समय बिताती है एवं उसे शुरूआती पाठ पढ़ाती है,वो इसलिए की,माँ बच्चे के जीवन में सबसे पहिले आती है,बच्चे को दुनिया से परिचित कराती है,उसे सिखाती है तथा उसे देखभाल करती है,पर इस बीच,बच्चे को किताबी दुनिया में,प्रवेश कराने पर,सबसे बड़ी चुनौती उस शिक्षक के लिए होती है,जो बच्चों में कोई भी भाषा,जो उसके लिए अपरचित हो,व उस बच्चे को,शारीरिक और भावनात्मक रूप से,पोषित करने की आवश्यकता होती है,बच्चे को भावनात्मक जरूरतों को समझते हुये,उसे प्यार,उसके समर्थन और प्रोत्साहन से,अक्षर को पोषित करना हर शिक्षक के लिए वो लम्हें कठिन होते है | नवजात बच्चे के लिए”गुरु”शब्द का अर्थ सिर्फ औपचारिक शिक्षा देने वाला शिक्षक नहीं है,बल्कि वह हर वेक्ति है,जो बच्चे के जीवन में सकरात्मक प्रभाव डालता है | यह एक संकलित छायाचित्र नन्हें-मुन्हे छात्र आदित्य सम्राट एवं उसके शिक्षक कृष कुमार पर दर्शाते हुये,शिक्षक और शिष्य पर लिखे ऐसे सर्वजन गुरु के लिए उतप्रेरक सम्मान हैं |
