काको में गूँजी उम्मीद की दस्तक, कायनात इंटरनेशनल स्कूल में युवाओं ने लिखी प्रेरणा की नई इबारत”सैय्यद आसिफ इमाम काकवी


जहानाबाद: 12 अगस्त का दिन काको के कायनात इंटरनेशनल स्कूल के लिए सिर्फ़ एक तारीख़ नहीं, बल्कि एक यादगार कारवां बन गया। विश्व युवा दिवस के मौके पर स्कूल का आंगन रंगों, रौशनी और जोश से भर गया। सुबह की पहली किरण के साथ ही स्कूल परिसर में बच्चों की हंसी, शिक्षकों का स्नेह और मेहमानों का उत्साह मिलकर एक ऐसा माहौल बना रहे थे, जिसमें सिर्फ़ एक ही पैग़ाम गूँज रहा था— “युवा जागो, देश बदलो”।शुरुआत प्रेरणा से, अंत संकल्प पर
कार्यक्रम का आग़ाज़ तिलावत-ए-क़ुरआन से हुआ।
जहानाबाद के काको स्थित कायनात इंटरनेशनल स्कूल में विश्व युवा दिवस का आयोजन ऐसा हुआ मानो उम्मीदों का एक उजला सूरज पूरे आकाश पर फैल गया हो। बच्चों की मासूम मुस्कान और युवाओं की चमकती आँखों में आने वाले सुनहरे कल की तस्वीर साफ़ दिखाई दे रही थी। स्कूल के डायरेक्टर शकील काकवी ने दिल से निकले शब्दों में कहा— “आज का युवा ही आने वाले कल का निर्माता है”। उन्होंने बच्चों को समझाया कि किताबों के अक्षर तभी जीवन बदलते हैं, जब उनमें नैतिकता और इंसानियत की रूह भी शामिल हो। मध्यप्रदेश के इंदौर से आए विशेष अतिथि इक़बाल हुसैन गैरी और मक़बूल हुसैन गैरी ने अपने संघर्ष और सफलता की दास्तान साझा की। उनकी बातें किसी किताब के सुनहरे पन्नों की तरह बच्चों के दिल में उतर गईं— समय का क़द्र करना, मुश्किल वक्त में हिम्मत न हारना, और अपने सपनों के पीछे अडिग रहना ही सफलता का असली रास्ता है। कार्यक्रम में बच्चों ने गीत, नृत्य, नाटक और कविताओं के ज़रिये समाज को एकजुटता, देशभक्ति और सकारात्मक बदलाव का पैग़ाम दिया। हर प्रस्तुति के साथ तालियों की गूंज में उम्मीद और उत्साह का संगीत बजता रहा। युवा छात्र शारजील कालवी ने भी बच्चों को याद दिलाया कि शिक्षा सिर्फ़ इम्तहान पास करने का नाम नहीं, बल्कि अपने व्यक्तित्व को निखारने और समाज की ज़िम्मेदारी निभाने की कला है। अभिभावक और शिक्षक जब बच्चों की प्रस्तुतियों पर गर्व से मुस्कुरा रहे थे, तो साफ़ महसूस हो रहा था कि यह आयोजन सिर्फ़ एक दिन का नहीं, बल्कि आने वाले कल के लिए एक चिराग़ जलाने जैसा है। विश्व युवा दिवस का यह कार्यक्रम साबित कर गया कि अगर युवाओं में सकारात्मक सोच, हौसले की उड़ान और कर्मठता का जज़्बा हो, तो वे न सिर्फ़ अपनी ज़िन्दगी, बल्कि पूरे समाज की तस्वीर बदल सकते हैं।
डायरेक्टर शकील काकवी का संबोधन बच्चों के दिल को छू गया। उन्होंने कहा आज का युवा, कल का वास्तुकार है। किताबें तुम्हें ज्ञान देती हैं, लेकिन नैतिकता तुम्हें इंसान बनाती है।” उनकी बातों में यह साफ़ था कि शिक्षा का असल मक़सद सिर्फ़ डिग्री लेना नहीं, बल्कि अपने अंदर इंसानियत और जिम्मेदारी की रूह को ज़िंदा रखना है।जब बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियाँ दीं, तो अभिभावकों की आँखों में गर्व के साथ-साथ नमी भी थी। शिक्षकों के चेहरे पर यह संतोष साफ़ था कि उनकी मेहनत सही दिशा में जा रही है। विश्व युवा दिवस का यह आयोजन इस बात का सबूत था कि अगर युवाओं के अंदर सकारात्मक सोच, कर्मठता और एकजुटता हो, तो वे हर मुश्किल को मात देकर समाज में उजाला फैला सकते हैं। काको का यह दिन आने वाले सालों तक याद रखा जाएगा, क्योंकि इसने एक पूरी पीढ़ी के दिल में यह यक़ीन बो दिया कि “हम बदलेंगे, तो जमाना बदलेगा।
