देशबिहारराज्यलोकल न्यूज़
ग़म ही हासिल है


ग़म ही हासिल है
————————
खुशमिजाजी तो उनकी रगो में शामिल है
ये और बात फक्त गम ही हासिल है
किसी के तलवे चाटने का आदि न था
वह शख़्स सबकी नज़रों में ज़ाहिल है
ग़ैरों ने तो बस शमशीर ही निकाला था
दोस्तों ! उनके अपने ही उनका क़ातिल है
परिंदे की उड़ान को देखेगा यह जमाना
आसमान से भी परे उनकी मंज़िल है
ख़ुशमिजाजी तो उनकी रगों में शामिल है
ग़ज़ल —परिंदा जहानाबादी