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देश की शान में आंच न आए


देश की शान में आंच न आए
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देश की शान में आंच न आए
इसकी हिफाजत में जां जाए तो जाए
आज खाएं कसम नौजवानों
आज खाएं कसम नौजवानों
वंदे मातरम वंदे मातरम वंदे मातरम
लिए हैं जन्म इस मिट्टी में हम
हे जान से प्यारा ये वतन
रग रग में रवा, है ये इश्क मेरा
चूमू इसे करूं मैं नमन
जिसकी गोद में चैन हम पाएं
इसकी हिफाजत में जां जाए तो जाए
आज खाएं कसम नौजवानों
आज खाएं कसम नौजवानों
वंदे मातरम वंदे मातरम वंदे मातरम
कहे धरती गगन महकी चंचल पवन
वीरों का है ये चमन
हुए कुर्बान कितने देश पर जवान
कि पाए सभी चैन ओ अमन
दाग इसे अब लगने न पाए
इसकी हिफाजत में जां जाए तो जाए
आज खाएं कसम नौजवानों
आज खाएं कसम नौजवानों
गीतकार परिंदा जहानाबादी उर्फ बलिराम प्रसाद स्वर्णकार