देशबिहारराज्यलोकल न्यूज़
त्रिशंकु सा हाल हुआ


—————————
मंज़िल के क़रीब आकर जो रास्ता भटक गया
त्रिशंकु सा हाल हुआ
वह बीच में लटक गया
वह शख़्स कल तक था जो
सबका अज़ीज़
आज सबकी नज़रों में
जाने क्यूं खटक गया
सांस जब तक है ज़िस्म में
जंग ज़ारी रखो
वह क्या इतिहास रचेगा
जो सटक गया
कुछ भी करो “परिंदा “
दुनिया तो कहेगी ही
लोगों की सुनी जिसने भी
वहीं पे अटक गया
मंज़िल के क़रीब आकर जो
रास्ता भटक गया
त्रिशंकु सा हाल हुआ
वह बीच में लटक गया
परिंदा जहानाबादी उर्फ़ बलिराम प्रसाद स्वर्णकार