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प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर स्वच्छता कर्मियों का हुलासगंज में चल रहा प्रशिक्षण


हुलासगंज (जहानाबाद)
हुलासगंज स्थित प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई में स्वच्छता कर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उप विकास आयुक्त  के निदेशानुसार जिले में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है। जिला सलाहकार श्री पिंकु कुमार (ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन) ने बताया कि यह प्रशिक्षण विशेष रूप से प्लास्टिक कचरे के बेहतर प्रबंधन पर केंद्रित है।

उन्होंने बताया कि प्लास्टिक अपशिष्ट ठोस कचरे का एक विशेष प्रकार है जो धीरे-धीरे विघटित होता है और पर्यावरण पर गंभीर दुष्प्रभाव डालता है। ऐसे में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की एक अनिवार्य और महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है। स्वच्छता कर्मी इसके प्रबंधन की जमीनी रीढ़ होते हैं।

वर्तमान में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम काको, हुलासगंज, घोषी एवं मोदनगंज प्रखंडों के स्वच्छता कर्मियों एवं संबंधित पंचायत स्वच्छता पर्यवेक्षकों के लिए चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य उन्हें कचरे के प्रसंस्करण केन्द्रों के प्रभावी संचालन, कचरे के सही अलगाव और मूल्यवर्धन की प्रक्रिया में दक्ष बनाना है, जिससे अपशिष्ट प्रबंधन के साथ-साथ कचरा संग्रहण केन्द्र भी आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।

प्रशिक्षण सत्र में निम्नलिखित पहलुओं पर विशेष बल दिया जा रहा है:

1. प्लास्टिक कचरे की पहचान और वर्गीकरण: विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक (PET, HDPE, LDPE, MLP आदि) को पहचान कर उन्हें सही तरीके से अलग करने की जानकारी।


2. पुनर्चक्रण योग्य अपशिष्ट में वृद्धि: रीसायक्लिंग योग्य कचरे को अधिक मात्रा में पृथक कर उद्योग को भेजने हेतु प्रेरित करना।


3. स्वास्थ्य एवं सुरक्षा: खतरनाक एवं नुकीले अपशिष्ट से सुरक्षित तरीके से कार्य करना।


4. प्रक्रिया में दक्षता: कम समय में अधिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करना।


5. पर्यावरणीय जागरूकता: प्लास्टिक प्रदूषण के दुष्प्रभावों की जानकारी एवं रोकथाम में भागीदारी।


6. डिजिटल टूल्स का उपयोग: मोबाइल ऐप, ट्रैकिंग सिस्टम आदि के माध्यम से निगरानी और रिपोर्टिंग।


7. आत्मसम्मान एवं आजीविका में वृद्धि: प्रशिक्षण से कर्मियों को नए अवसर एवं जिम्मेदारियाँ मिलती हैं जिससे उनका आत्मविश्वास और सामाजिक-आर्थिक स्थिति बेहतर होती है।



जिला प्रशासन द्वारा इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से न केवल अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूती मिलेगी, बल्कि स्वच्छता कर्मियों को भी एक नई पहचान और सम्मान प्राप्त होगा।

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