जन-जागरूकता और रोकथाम ही है बचाव का सर्वोत्तम उपाय


जहानाबाद
मानव सभ्यता की शुरुआत से ही कृषि एवं पशुपालन हमारी जीवनशैली का अहम हिस्सा रहे हैं। आज पशुपालन न केवल आजीविका का एक प्रमुख स्रोत है, बल्कि मानव स्वास्थ्य से भी प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले रोगों को जोनोसिस कहा जाता है। रेबिज, ब्रुसेलोसिस, क्लासिकल स्वाईन फीवर एवं एवियन इन्फ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) जैसे रोग अत्यंत घातक सिद्ध हो सकते हैं।
विश्व जोनोसिस दिवस प्रत्येक वर्ष 06 जुलाई को मनाया जाता है, ताकि पशु जन्य रोगों की रोकथाम हेतु जन-जागरूकता बढ़ाई जा सके। इस अवसर पर पशुपालन विभाग द्वारा टीकाकरण एवं सूचना कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
प्रमुख जोनोसिस रोग एवं उनके रोकथाम के उपाय:
1. रेबिज (Rabies):
यह रोग कुत्ता, सियार, लोमड़ी, बिल्ली, बंदर आदि जानवरों के काटने से फैलता है और यह जानलेवा होता है।
रोकथाम:
पशुओं का रैबिज टीकाकरण।
यदि काटने की घटना हो जाए तो Post-Bite Anti Rabies Vaccine निर्धारित तिथि पर जरूर लें।
सभी प्रखंड स्तरीय पशु चिकित्सालयों में यह टीका उपलब्ध है।
2. ब्रुसेलोसिस (Brucellosis):
यह रोग गाय-भैंस में गर्भपात का कारण बनता है और संक्रमित पशुओं के संपर्क से मनुष्यों में भी फैलता है।
रोकथाम:
संक्रमित द्रवों और दूध के सीधे संपर्क से बचाव।
4 से 8 माह की वाछी एवं पाड़ी बछियों का जीवन में एक बार टीकाकरण।
यह टीका बिहार सरकार द्वारा निःशुल्क लगाया जाता है।
3. क्लासिकल स्वाईन फीवर (CSF):
यह सूकरों में पाया जाने वाला एक संक्रामक विषाणु रोग है जो अप्रत्यक्ष रूप से मनुष्यों को प्रभावित कर सकता है।
रोकथाम:
सभी सूकरों का वार्षिक टीकाकरण आवश्यक है।
यह टीका भी निःशुल्क उपलब्ध है।
4. बर्ड फ्लू (Avian Influenza):
यह एक घातक विषाणु जनित रोग है जो पक्षियों, विशेषकर मुर्गियों के माध्यम से मनुष्यों में फैल सकता है।
रोकथाम:
संक्रमित मुर्गियों का तुरंत Culling (निस्तारण)।
फार्म की स्वच्छता एवं नियंत्रण व्यवस्था।
प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय संपर्क पर रोक।
आइए, हम सभी मिलकर टीकाकरण, स्वच्छता, सुरक्षित पशुपालन एवं जनजागरूकता को अपनाते हुए जोनोसिस रोगों से स्वयं एवं समाज को सुरक्षित रखें।
“एक स्वस्थ पशु – एक स्वस्थ मानव – एक स्वस्थ समाज” की दिशा में यह हमारा सामूहिक प्रयास हो।