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—-गीतकार परिंदा जहानाबादी का सफरनामा—-



जिंदगी के अनुभवों को तरन्नुम का रूप देने वाले जिस शख्सियत से मैं आपको रूबरू कराने जा रहा हूं वह है उभरते हुए युवा गीतकार परिंदा जहानाबादी उर्फ बलिराम प्रसाद स्वर्णकार , कहते हैं हौसले जवान और इरादे बुलंद हो तो मंजिल क़दमों तले ख़ुद ही आ जाती है , परिंदा जी को लिखने की प्रेरणा उनके पिता स्वर्ग कृष्ण लाल से मिली , वो भजन लिखते और ख़ुद गाते भी थे वहीं से परिंदा जी के जेहन में लिखने की ईच्छा जगी l
वह साल 2002 का दौर था जब परिंदा जी की कविताएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और अखबारों में छपा करती थीं , धीरे धीरे जेहन में शेरो शायरी के जज़्बात जगे
ज़िंदगी के तजुर्बों ने ख्वाहिशों को पंख दिया और गीतकार बनने की तलब जगी , सारी दुनिया में अपने गीतों की गूंज सुनाई दे , ये ख्यालात परिंदा जी के दिल में घर करने लगा था लेकिन ये सफ़र इतना आसान नहीं था l परिंदा जी 2005  में मुंबई गए
बिहार से बॉलीवुड का सफर बहुत ही संघर्षों से भरा रहा , मुंबई में जमने के लिए कई छोटे मोटे काम करने पड़े, कई जगह जिल्लत भी सहनी पड़ी, बहुत संघर्षों के बाद 2010 में पहला अलबम माता का भजन मिला
जिसमें बॉलीवुड सिंगर मोहम्मद सलामत  खुशबू जैन और मधुकर बर्मा ने आवाज़ दी थी l
इसके बाद एल्बमों का सिलसिला चल पड़ा , पुरवइया उड़ावे चुनरिया जिसमें बॉलीवुड के मशहूर गायक बिनोद राठौड़
साधना सरगम, आलोक कुमार इत्यादि ने आवाजें दी थीं
इसके बाद दे दे मईया भक्ति का वरदान दे, पटना के पटाखा, इसके बाद हिंदी मूवी शूद्र ए लव स्टोरी मिला , परिंदा जी के गीतों की लम्बी फेहरिस्त है जिसमें कुछ गीत होली आई रे, श्री राम अवध में आयो रे, तेरी आदत हो गई , चैन क्या सुकून क्या , मस्ताने श्री राम के , सनातनी हम भगवाधारी हैं इत्यादि आने वाले गीतों में मां मांडवेश्वरी देवी का पावन है दरबार, यादों के जंगल,
प्यार में मिलल धोखा, संग जिए मरे के वादा, महाकाल के दीवाने
छवि अति प्यारी राम भजन

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