भगवान की कथा सुनने से जन्म-जन्मांतर के पाप से मुक्ति संभव : हरेरामाचार्य



-खसखोरी में श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ में स्वामी जी कर रहे श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन
मखदुमपुर (जहानाबाद )
जाने माने संत व हुलासगंज आध्यात्मिक संस्थान के प्रमुख स्वामी हरेरामाचार्य जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत सभी वेदों का सार है। इसे सुनने मात्र से मनुष्य जन्म-जन्मांतर के पाप से मुक्त हो जाता है। इसके साथ ही कथा सुनने से मनुष्य को अपने उद्देश्य के परम लक्ष्य की प्राप्ति संभव हो जाता है। वे प्रखंड के खसखोरी गांव में ग्रामीण संतोष कुमार की अगुआई में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के तीसरे दिन शनिवार को अपने सारगर्भित प्रवचन से श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन कर रहे थे। उन्होने कहा कि यदि आपके पास एक स्थान पर बैठकर प्रभु का नाम लेने का समय नहीं है तो चलते-फिरते भी अपने मन मंदिर में परमेश्वर का सच्चे मन से स्मरण कर सकते हैं। ऐसा करने पर भी मनुष्य को कथा श्रवण का पुण्य फल प्राप्त होगा। उन्होंने एक प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि पहली बार कथा श्रवण मात्र से ही राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई और उनका अकाल मृत्यु से बचाव भी संभव हो पाया था। आगामी नौ जुलाई तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन को लेकर गांव से लेकर इलाके में उत्साह का माहौल है। स्वामी जी महाराज ने भगवान की अनेक लीलाओं की चर्चा हुई करते हुए कहा कि नारायण की श्रेष्ठतम लीला रासलीला है। उन्होंने बताया कि रास तो जीव का शिव के मिलन की कथा है। यह काम को बढ़ाने की नहीं काम पर विजय प्राप्त करने की कथा है। रुकमणी स्वयं साक्षात लक्ष्मी है और वह नारायण से दूर नहीं रह सकती। यदि जीव अपने धन अर्थात लक्ष्मी को भगवान के काम में लगाए तो ठीक, नहीं तो फिर वह धन चोरी द्वारा, बीमारी द्वारा या अन्य मार्ग से हरण हो ही जाता है।
-भगवत नाम के जाप व माता-पिता की सेवा से मिलती है कष्टों से मुक्ति :
स्वामी जी ने कहा कि कलयुग में भगवत नाम जाप व माता पिता की सेवा से मानव के तमाम कष्टों का निवारण संभव है। उन्होने कहा कि चौबीस घंटे में अगर कोई सिर्फ 5 मिनट भी सच्चे मन से भगवान की भक्ति करता हैं तो उसे कई प्रकार की कष्टों से मुक्ति मिल सकती है। ईश्वर पर भरोसा कर मनुष्य को खुद को उनके समक्ष समर्पित कर देना चाहिए क्योंकि जो भी हो रहा है, सब प्रभु की इच्छा से ही हो रहा है। स्वामी जी ने कहा कि सिर्फ गोविंदाये नमो नमः का जाप करने से आप घर में सुख शांति और समृद्धि बनी रहेगी। स्वामी जी ने श्रीमद्भागवत के एक प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान की पूजा और भक्ति करने की कोई उम्र सीमा नहीं होती। भक्त ध्रुव और प्रहलाद ने 5 वर्ष की आयु भगवान नारायण की भक्ति शुरू कर दी थी। स्वामी जी ने भक्त प्रहलाद की जीवनी की विशद् चर्चा की। उन्होंने कहा कि भक्त प्रहलाद को बचपन से ही कई प्रकार की यातनाएं दी गई। लेकिन हमेशा नारायण उनकी रक्षा करते रहे। आग से जलाने का प्रयास किया गया लेकिन फिर भी वह भगवान की कृपा से सुरक्षित बच गए। तब जाकर फिर हिरण्यकशयपू ने प्रहलाद से पूछा कि तुम्हारी रक्षा कौन कर रहा है। उसने कहा कि जो सब की रक्षा करते हैं, जो सभी जगहों पर रहते हैं, खंभे में भी हैं। वही उसकी रक्षा कर रहे हैं। प्रहलाद ने हिरण्यकश्पु को भी सलाह दी थी कि वह भी ईश्वर की शरण में चला जाए, भगवान उसका भी कल्याण कर देंगे। लेकिन अहंकार व अज्ञानता के कारण उसने ऐसा नहीं किया तो उसका हश्र सभी जानते हैं। भगवान ने नरसिंह अवतार लेकर प्रहलाद के पिता को ब्रह्म जी के वरदान के अनुसार शाम के समय अपने जांघ पर कर हत्या की। कथा के दौरान स्वामी जी ने सृष्टि की रचना पर भी प्रकाश डाला।
-माता-पिता साक्षात देवता, सेवा पर ईश्वर की होती है कृपा :
उन्होने श्रीमद्भागवत कथा की महता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि माता और पिता भी साक्षात देव हैं। जो लोग माता पिता और सास, श्वसुर की सेवा करते हैं, उन पर भगवान नारायण की सदैव कृपा होती है। उनके घर में हमेशा खुशहाली आती है। लेकिन जहां मां और पिता का अपमान हो रहा है, वहां कलह का वास होता है। धन की भी भारी हानि होती है। आज बड़े पैमाने पर वृद्धा आश्रम बन रहा है, जो समाज के अज्ञानता व दुर्भाग्य का प्रतीक है। उन्होने बताया कि वृंदावन में एक ऐसा आश्रम है, जहां पांच हजार से अधिक माताएं रहती हैं। कलियुग में बुजुर्गों पर अत्याचार काफी बढ़ गया है। स्वामी जी ने कहा कि अब भी वक्त है लोग जागें और अपने मां और पिता की सेवा करें। कोई कुछ भी करे, शांति नहीं मिलेगी, लेकिन माता-पिता की सेवा से ही कल्याण संभव है।कथा में शामिल संतोष शर्मा,राजदेव शर्मा,कमलेश शर्मा पूर्व मुखिया,अजीत शर्मा,संजीव कुमार,उत्कर्ष कुमार,प्रिंस कुमार,सोनू कुमार साहित्य अन्य भगत गण शामिल हुए।