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12 घंटे में बहाल हुई बिजली, डीएम की सख्ती का असर



अरवल।

अरवल जिले में चार दिनों से जारी बिजली संकट पर जिलाधिकारी कुमार गौरव की सख्ती आखिरकार रंग लाई। शनिवार को जिला समाहरणालय में उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों के साथ आपात समीक्षा बैठक की, जिसमें जिलेभर में बिजली आपूर्ति में आ रही बाधाओं को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। विद्युत कार्यपालक अभियंता ने बताया कि अत्ताउल्लाह स्थित 132 किलोवाट ग्रिड सब स्टेशन में तकनीकी खराबी के कारण जिले में बिजली आपूर्ति प्रभावित थी। अब इस खराबी को पूरी तरह ठीक कर लिया गया है और अत्ताउल्लाह ग्रिड से पुनः नियमित रूप से बिजली आपूर्ति शुरू कर दी गई है।बैठक में केयाल, कुर्था और अरवल पावर सबस्टेशन में आगजनी और अन्य तकनीकी खामियों की भी जानकारी दी गई। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इन सभी समस्याओं का समाधान तत्काल और युद्धस्तर पर किया जाए। साथ ही उन्होंने कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार भ्रमणशील रहने का आदेश दिया ताकि जमीनी स्तर पर हो रही समस्याओं की निगरानी की जा सके। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।डीएम कुमार गौरव ने अधिकारियों को 12 घंटे के भीतर जिलेभर में बिजली व्यवस्था पूरी तरह बहाल करने का निर्देश दिया। डीएम के निर्देशों का असर भी जल्द ही देखने को मिला और शनिवार की शाम होते-होते जिले के अधिकतर हिस्सों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई। इससे आम लोगों को काफी राहत मिली और गर्मी व जल संकट से जूझ रही जनता ने चैन की सांस ली।बिजली व्यवस्था सुधरते ही जिलेभर से जिलाधिकारी के प्रति आभार प्रकट करने की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुर्था, अत्ताउल्लाह, अरवल सहित कई इलाकों के स्थानीय लोगों जैसे रमेश कुमार, विवेक कुमार, संजय यादव, सुरेंद्र शर्मा, राधेश्याम शर्मा, योगेंद्र शर्मा, संजय कुमार और सुमित ने कहा कि ऐसा जिला पदाधिकारी अरवल में पहले कभी नहीं देखा गया। उन्होंने कहा कि जब डीएम किसी मामले को संज्ञान में लेते हैं तो उसका समाधान सुनिश्चित होता है।जानकारी के अनुसार, जिलाधिकारी खुद भी पूरी रात बिजली आपूर्ति की स्थिति पर नजर बनाए रहे। वे देर रात तक अधिकारियों से संपर्क में रहे और लगातार फील्ड से रिपोर्ट मंगवाते रहे। लोगों ने कहा कि जब जनता अंधेरे में थी, तब डीएम खुद जाग रहे थे और हर जगह की स्थिति की निगरानी कर रहे थे। उनका यह कदम न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी की मिसाल भी है।डीएम की तत्परता, सख्ती और संवेदनशीलता ने बिजली विभाग को मजबूर कर दिया कि वह फुर्ती से काम करे और जनता को राहत दे। जिले में चार दिनों से जारी बिजली संकट पर इस तरह की त्वरित कार्रवाई ने सिस्टम को भी झकझोर कर रख दिया। आमजन ने कहा कि अगर हर अफसर ऐसा हो जाए, तो समस्याएं खुद भागने लगें।

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