योग केवल आसनों की श्रृंखला नहीं- एक जीवन दर्शन है- डॉ नवल किशोर

जहानाबाद
आज हम सभी एक ऐसे दिवस को मना रहे हैं, जिसकी जड़ें हमारी हजारों वर्षों पुरानी संस्कृति में है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस यह केवल एक तिथि नहीं है यह मानवता को एक सूत्र में बांधने वाली एक दिव्य प्रेरणा है। भारत ने जब दुनिया को योग का यह वरदान दिया तो वह केवल आसनों की श्रृंखला नहीं थी। वह एक जीवन दर्शन था। उक्त बातें मानस विद्यालय के संस्थापक चेयरमैन डॉ नवल किशोर ने योग दिवस पर उपस्थित छात्रों, अभिभावकों एवं शिक्षको को सम्बोधित करते हुए कहा। उन्होने कहा आज के इस आधुनिक युग में जहां तनाव , अवसाद और मानसिक अस्थिरता बढ़ती जा रही है योग एक ऐसा प्रकाश स्तम्भ है, जो हमें सन्तुलन, स्थिरता और आंतरिक शक्ति प्रदान करता है। निदेशक अभिषेक आनन्द ने कहा योग का महत्व केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। यह एक आर्थिक, सामाजिक और वैश्विक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब कोई समाज स्वस्थ होता है तो वह अधिक उत्पादक होता है। जब कोई व्यक्ति मानसिक रूप से शांत होता है, तो वह हिंसा नहीं करता, संवाद करता है। इसलिए योग विश्व शांति का मार्ग भी है। दूसरों के लिए अच्छा सोचिये, मन ही मन योग हो गया। यदि सेवा करने लग जाएं, अपना काम स्वयं करना शुरू कर कीजिये योग बन गया। योग के कई रूप हैं। केवल हाथ पैर हिलाना, आँख बंद करके सीधी कमर करके बैठना ही योग नहीं है। यह भारत के सांस्कृतिक नेतृत्व का प्रमाण है। प्राचार्य नीरज कुमार ने बताया आज का दिन हम सभी से एक आहवान करता है- आइये हम केवल योग दिवस पर योग न करें बल्कि हर दिन, हर सुबह इसे अपनाएं और अपने परिवार, समाज और राष्ट्र को स्वस्थ और समृद्ध बनाएं। शिक्षक राजीव नयन, मनीष कुमार, प्रभात कुमार श्री राम शर्मा इत्यादि ने भी अपने विचार रखे।
