सफ़र-ए-ज़िंदगी की सबसे हसीं नेमत मेरी हमसफ़र दीबा हसन

कभी-कभी अल्फ़ाज़ भी कम पड़ जाते हैं जब बात उन रिश्तों की होती है जो दिल की गहराइयों से जुड़े होते हैं। आज जब मेरी ज़िन्दगी की हमसफ़र, मेरी दोस्त, मेरी ख़ुशी की सबसे बड़ी वजह दीबा हसन साहिबा का जन्मदिन है, तो दिल से सिर्फ़ एक दुआ निकलती है ऐ ख़ुदा, इस रिश्ते को अपने साए में हमेशा महफूज़ रखना। शादीशुदा ज़िन्दगी को लोग अक्सर एक समझौता मान बैठते हैं, लेकिन मेरे लिए यह रिश्ता नेमत, रहमत और सुकून का नाम है। दीबा, तुमने हर मोड़ पर, हर संघर्ष में, हर ख़ुशी और हर आँसू में मेरा साथ दिया सिर्फ़ हाथ थामकर नहीं, बल्कि दिल से मेरा संभल बनीं। जब-जब दुनिया उलझी, तुमने सलीके से सुलझाया। जब-जब हालात बिगड़े, तुमने मुस्कुराकर सहारा दिया। हमारे बेटों आदयान और इज़ान की हँसी में जो सुकून है, उसमें तुम्हारी ममता, तुम्हारी मेहनत और तुम्हारे उसूलों की झलक साफ़ दिखती है। तुमने जिस तरह इस घर को एक महकती बग़िया बना दिया है, वह मेरे लिए सबसे बड़ा तोहफा है। आज तुम्हारे जन्मदिन पर मैं यह कहना चाहता हूँ कि तुमसे मिलना मेरी ज़िन्दगी का सबसे हसीं मोड़ था।
तुम मेरी हर सुबह की पहली दुआ हो और हर रात की राहत।
तू मिल गई तो मुकम्मल हुआ मेरा वजूद,
तेरे बिना ये ज़िन्दगी अधूरी-सी लगती है।
हर साँस में बसी हो तुम, हर दुआ में हो शामिल,
तुमसे बेहतर मेरे लिए क्या कोई तौफ़ीक़ होगी खुदा की।
दीबा हसन, तुम्हारी सादगी, तुम्हारी सहनशीलता और तुम्हारे अंदर छुपा वह उजला इंसान — इन सबसे मैं हर रोज़ कुछ न कुछ सीखता हूँ। तुम्हारे लिए मेरी दुआ है कि खुदा तुम्हें सेहत, सकून, कामयाबी, और मोहब्बतों से भरी एक लंबी उम्र दे। तुम्हें तुम्हारी सालगिरह की बहुत-बहुत मुबारकबाद। हर साल तुम्हारे लिए नई खुशियाँ लेकर आए, और हम यूं ही साथ साथ उम्र भर चलते रहें। तुम मेरी दुनिया हो, और तुम्हारी मुस्कुराहट मेरी जन्नत है।
सैय्यद आसिफ इमाम काकवी
(तुम्हारा शौहर, तुम्हारा मुरीद)
