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क्या इस विमान हादसे के बाद कोई जवाबदेह ठहराया जाएगा?

क्या इस विमान हादसे के बाद कोई जवाबदेह ठहराया जाएगा?

✍️ सैयद आसिफ इमाम काकवी

भारत में जब भी कोई बड़ा हादसा होता है  चाहे वह ट्रेन दुर्घटना हो, पुल गिरना हो या अब यह Air India की फ्लाइट AI‑171 का भयावह क्रैश  तो एक तयशुदा सरकारी रिवाज़ चल पड़ता है
तुरंत संवेदना व्यक्त करो, कुछ करोड़ का मुआवज़ा घोषित करो, और औपचारिक जांच आयोग बैठा दो।लेकिन सवाल यह है  क्या किसी की जान का मोल सिर्फ़ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और कुछ औपचारिक बयानों से अदा किया जा सकता है?
क्या हम फिर से इस मामले को तकनीकी गड़बड़ी” कहकर रफ़ा-दफ़ा कर देंग  यह विमान अहमदाबाद से लंदन के लिए रवाना हुआ था। इसमें 230 यात्री और 12 क्रू मेंबर सवार थे। उड़ान भरने के महज 5 मिनट बाद ही तकनीकी खराबी की वजह से यह विमान बी.जे. मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल पर जा गिरा। भयंकर आग और लगातार धमाकों ने मौके को दहशत और तबाही में बदल दिया। दर्जनों मौतें हुईं, कई लोग झुलसकर गंभीर रूप से घायल हुए। लेकिन सवाल यह है
क्या यह सिर्फ़ तकनीकी विफलता थी? या फिर एक और उदाहरण है हमारे निगरानी तंत्र की नाकामी का?
असली सवाल जो पूछे जाने चाहिए
क्या इस दुर्घटना की वास्तविक वजह सार्वजनिक की जाएगी? क्या विमान की मरम्मत और निरीक्षण रिपोर्ट सामने लाई जाएगी? क्या पायलट की आपातकालीन कॉल को गंभीरता से लिया गया? क्या एयरलाइंस के निजीकरण के बाद सुरक्षा मानकों में गिरावट आई है? क्या इस हादसे की राजनीतिक जिम्मेदारी तय होगी?
क्या नागरिक उड्डयन मंत्री या DGCA के किसी अधिकारी को हटाया जाएगा? यह मान लेना कि हर बड़ा हादसा सिर्फ़ “नियति” का खेल है एक खतरनाक सांस्कृतिक सोच बन चुकी है। यदि पहले की दुर्घटनाओं से हमने कुछ सीखा होता, तो शायद AI‑171 हादसा रोका जा सकता था। समस्या केवल मशीनों की नहीं है  मानव लापरवाही, निरीक्षण में कोताही और प्रशासनिक उदासीनता इसके मूल कारण हैं। मुआवज़ा सराहनीय, पर क्या यही पर्याप्त है? टाटा ग्रुप ने मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये, घायलों के इलाज और हॉस्टल पुनर्निर्माण का वादा किया है . यह एक मानवीय और तात्कालिक कदम है, लेकिन सवाल उठता है  क्या न्याय मुआवज़े से पूरा हो जाता है? नहीं! न्याय तभी होता है जब दोषी को सज़ा मिले, सिस्टम में सुधार हो, और अगली बार कोई नया परिवार शोक में डूबने से बच सके। अब ज़रूरत है सवाल पूछने की किसकी गलती थी? कौन जिम्मेदार है? क्या कोई अफसर हटाया जाएगा? क्या अगली उड़ानें सुरक्षित हैं? हमें अब सिर्फ़ प्रेस नोट नहीं चाहिए, हमें जवाबदेही से जुड़ा सिस्टम चाहिए। जब तक हम सवाल पूछते रहेंगे, तब तक सिस्टम में जवाबदेही की उम्मीद भी बनी रहेगी।
लेकिन अगर हमने चुप्पी ओढ़ ली
तो हर त्रासदी को “दुर्भाग्य” कहकर फाइल बंद कर दी जाएगी। अब वक़्त है कि हम सिर्फ़ आँसू न बहाएं, बल्कि एक न्यायपूर्ण और जवाबदेह व्यवस्था की मांग करें। हमें रहम नहीं, सिस्टम चाहिए। हमें संवेदना नहीं, जवाबदेही चाहिए।

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