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दिल और जज्बात | डॉक्टर एकता की कलम से

दिल और जज्बात

दिल और जज़्बात के बीच यू पीस चुकी हूँ।कुछ समझ में न आए किस ओर चल पड़ी हूँ।।

लोग कहते है कि सब अपने है,फिर वही लोग कहते है सब सपने है😌।।

कौन सुनेगा किसको सुनाउ अपनी दिल की कहानी।
इसलिए चुप रहती हूँ 😌।।

औरत के ना जाने कितने रूप है
हर रूप में कितने गुण है फिर ए औरत ही औरत के क्यों दुश्मन है।।

कौन सुनेगा किसको सुनाउ अपनी दिल की कहानी।
इसलिए चुप रहती हूँ 😌।।

शादी के बाद छूटा अपना घर,
ससुराल को बनाया अपना घर।
पर ए जान ना पाई मै की लाख जतन कर लूं मैं बेटी नहीं बहु हूँ मैं ए बात समझ में आई देर।।
ए हर हर घर की कहानी बन गई मै ।।
      बिन्टी कुमारी कि कलम से—–

डॉक्टर एकता की कलम से

दिल में कई मलाल है जिंदगी से कितने सवाल है दिल करता है पूछ लू तुम चाहती क्या है?
हर पल लेती एक इम्तिहान हो

हर रास्ते पर एक ठोकर क्यों राखी है?
आंखों से बहता पानी और हमारे दिल की कहानी हर किसी को समझ नहीं आती।
हमने प्यार बहुत बाटली गैरों में अब थोड़ा खुद से भी करना है
लोग आए और चले गए अपने मतलब के हिसाब से।
जख्मी हो गया है दिल हमारा ख्वाब पर किसी ने वार किया है।
जिस्म तो सलामत है पर रूह को किसी ने मार दिया।
दिल को यह मालूम था की ख्वाब झूठे हैं और ख्वाहिश अधूरी है
साहब  जिंदा रहने के लिए कुछ गलतफहमियां भी जरूरी है

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