देशबिहारराज्यलोकल न्यूज़
डॉक्टर एकता की कलम से —-


जो हमारे हाथ के लकीरों में नहीं
उसे हृदय से भी आजाद कर दो
उलझा रहा चालाकियो में यह जमाना
उसे पता ही ना चला क्या पाने की चाह में
सादगी से भरा हमसफर को ख़ो दिया
कभी लफ्ज़ भी कम पडते थे उसकी लिखने को अहमियत
दिल कहता रहा तुम बिन अधूरी हूं मै
ओ बेखबर यौवन के नशे में चूर था
एक औरत की वफादारी का सजा
धोखा भी हमें मिले रोये भी हम
इल्जाम भी हम पे ही लगे
गुनहगार भी हमें ही बने
निकाल दो यह गलतफहमी की हम जबाब नहीं देंगे
सब्र रख पल-पल का हिसाब लेंगे
ज्यादा फिक्र मत करना नायब तरीके से पेश आएंगे हम
मैं एक खानदानी राजवंशी हूं दुश्मन से भी सलीके से पेस आते है।