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डॉक्टर एकता की कलम से

डॉक्टर एकता की कलम से




हर जख्म छुपाना पड़ता है

चेहरे पर चेहरा लगाना पड़ता है
कुछ हार गई तकदीर के आगे
कुछ लुट गए सपने इस दिल के
कुछ गैरों ने बर्बाद किया
भूल गए अपने सारे
दिल हर पल आहे भरता है
समाज और फर्ज के बीच में
अरमान सारे दिल के आंखों तक आकर रह गए
ना पूरा करना हमारे बस में था
ना आंसू बन बहना उनके हक में था

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